Tuesday, 22 February 2022

व्यक्तित्त्व विकास कैसे करें ?



आज थोड़ा अलग फिर से | जब हम ये कहते हैं कि हमें अपने व्यक्तित्त्व का विकास करना है, तो हम अक्सर कुछ और कह रहे होते हैं | हम कह रहे होते हैं, कि कुछ है हममें जो हमें काफी नहीं लगता | कोई आयाम है व्यक्तित्त्व का जो बेहतर हो सकता है | कुछ है जिसके कारण आत्मविश्वास कम है | लेकिन, एक मिनट रुक कर अब इसे एक दूसरे नज़रिये से देखें |

जब आप कहते हैं विकास करना है, तो क्या ये अहसास-ए -कमतरी नहीं है ? क्या ये ऐसा नहीं है जैसे हम ये कह रहे हों, कि हम जो भी हैं, जैसे भी हैं, वैसे खुद को स्वीकार नहीं हैं ?  हम बेहतर हो सकते हैं | किस से? अपने आप से बेहतर होना सबसे बड़ा झूठ है जो आपके दिमाग में भरा गया है | पहले अपने व्यक्तित्त्व को टुकड़ों में तोड़ें, अपने आप को, अपने जीवन को, अपनी यात्रा को हिस्सों में बांटें और फिर एक हिस्से की तुलना दूसरे से करें ? और फिर ये उम्मीद करें कि होलिस्टिक ग्रोथ या सम्यक विकास होगा? किसी पौधे की जड़ को अलग, और पत्तों को अलग, और तने को अलग उगते देखा है क्या कभी ?

अब कहना मनुष्य और पौधों की तुलना बेतुकी है | OK , बेशक है | फिर एक मनुष्य की तुलना दूसरे मनुष्य से - ये कैसे तुक की बात हुई? और फिर एक मनुष्य की तुलना अपने ही आप से - ये और भी वाहियात बात हुई :D लेकिन इसको हम compartmentalization, problem solving और पता नहीं क्या क्या नाम देते हैं | एकदम बढ़िया धंधा है !

अब पूछो तो फिर जहाँ हूँ वहां से आगे कैसे बढ़ूँ ? मेरा प्रश्न - आगे क्यों बढ़ना है ?

  1. अगर insecurity  के कारण, क्योंकि दूसरे से श्रेष्ठ दिखना है वगैरह वगैरह, तो मुझे मुआफ करें साहब, मुझे नहीं पता आप आगे कैसे बढ़ें, किसी सेल्फ हेल्प महानुभाव, बाबाजी आदि से पूछें | मैंने जीवन में किसी वक़्त में अपने आप को दूसरों के पैमानों से बहुत नापा है, एकदम वाहियात फीलिंग होती है, जो करना चाहते हो, जो कर सकते हो, वो भी नहीं कर पाते | ऐसी दशा मैं अपने दुश्मन की न चाहूँ तो ऐसी राय परिवार को, दोस्तों या पाठकों  को तो नहीं ही देनी मैंने |
  2. अगर इसलिए कि खुद के कल वाले version  से आगे बढ़ना है, तो भी मुझे माफ़ करें | मैंने ये भी बहुत साल किया है |  जिनके लिए ये तरीका काम करता है, उनके लिए बहुत अच्छा है | जब तक ये काम करता है, तब तक बहुत अच्छा | लेकिन इससे सिर्फ incremental growth  मिलती है, टुकड़े टुकड़े पर काम करेंगे तो growth  भी टुकड़ा टुकड़ा ही होगी | कुछ लोग इतने भर से संतुष्ट हो पाते हैं, कुछ नहीं हो पाते |  मैं नहीं हो पाई |
  3. अगर इसलिए कि कुछ करना है, क्योंकि कुछ करने का मन है (ये कुछ भी हो सकता है - नौकरी पाना, खेती करना, किताबें लिखना, लोगों की बात शांति से सुन पाना वगैरह ), तो चलो बात करते हैं | मुझे अब व्यक्तिगत तौर पर ये तरीका सबसे अच्छा लगता है | संभव है कल ये बदल जाये |


आज की तारीख में मैं ये नहीं सोचती कि मैं कौन हूँ, या कैसी हूँ | मैं ये सोचती हूँ कि मुझे करना क्या है, और क्यों? अगर मेरे करने से कुछ बेहतर होता हो, तो करने का कोई तुक भी है | वरना मन तो कुछ भी करने का हो सकता है, उसका क्या ? सो, मन नहीं, purpose  डिफाइन करती हूँ |

इस स्टेज में मुझे सामान्य तौर पर समय लगता है | इसलिए नहीं कि मुझे कोई confusion है | इसलिए कि मैं पलट के अफ़सोस नहीं करना चाहती, और गिल्ट ट्रिप पर भी नहीं जाना चाहती | मैं किसी और पर अपनी सफलता या असफलता का ठीकरा नहीं फोड़ना चाहती इसलिए जब एक बार ये समझ आ जाये कि करना क्या है, तो मैं एक timeline, एक प्लान ऑफ़ एक्शन, एक बजट, एक रिसोर्स लिस्ट बनाती हूँ | उसके बाद मैं शुरू हो जाती हूँ | मैं लोगों के वेलिडेशन का, उनकी सहमति का, उनकी ओपिनियन, उनके जजमेंट की चिंता कम ही करती हूँ |

लेकिन एक चीज़ जो मैं ज़रूर करती हूँ, वो है लोगों की बात एक बार सुनना और अगर उनके सवाल हैं (सवाल के नाम पर जजमेंट छुपाने का ढोंग नहीं ) तो उन सवालों के यथासंभव विचार कर के ईमानदारी से उत्तर देना |

इस प्रोसेस में कई बार मुझे अलग अलग चीज़ें सीखनी पड़ती हैं, कभी पैसे जुगाड़ने पड़ते हैं, कभी किसी और से सपोर्ट मांगना पड़ता है | कभी कभी ऐसा भी होता है कि मैं कुछ करना चाहूँ, लोग सपोर्ट भी करें, पैसा भी लगाए, और फिर भी किसी कारणवश वह काम हो न पाए | ऐसे में मैं साफ़ साफ़ बोल देती हूँ, बताती हूँ, पैसा, उनके resources, उनकी दी हुई सुविधा  लौटा सकूं तो लौटाती हूँ, न लौटा पाऊँ तो हरसंभव कोशिश करती हूँ कि उस काम को देर सबेर, कैसे भी पूरा करूँ |

कभी कभी ये कुछ भी नहीं हो पाता | लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि मैं इस लायक नहीं | इसका मतलब बस इतना है कि मैंने कुछ किया, उसका कोई result चाहा, लेकिन जो रिजल्ट आया वो मेरा मनपसंद नहीं था |

ये सब होने के बाद -

  • कुछ चीज़ें होने लगती हैं |
  • कुछ मनचाहे results  मिलने लगते हैं |
  • कुछ नए skills  सीख पाती हूँ |
  • कुछ और चीज़ें CV में जुड़ जाती हैं |
  • Confidence  अपने आप आने लगता है, और अगर पहले से है तो विकसित होने लगता है |
  • फिर एक दिन व्यक्तित्त्व अपने आप पहले से अलग होता है (विकसित होता है, transformed  होता है ) |

तो कुल सार ये कि अगर आप काम करने लगेंगे, तो व्यक्तित्त्व तो अपने आप बदल ही जायेगा |

और फिर एक दिन मुझे लोग अलग तरह से देखने लगते हैं, लेकिन सिर्फ इसलिए कि मैंने शुरू में परवाह नहीं की कि वे मुझे कैसे देखते हैं | मैंने सिर्फ ये चुना कि मुझे क्या करना है, कैसे, और जिस जिस से जो कुछ पा सकती थी, वो पाया, उसका शुक्राना रखा, और उसको हर संभव ज़िम्मेदारी से इस्तेमाल किया | जहाँ गलती हो गई (खुद को हमेशा पता होता है गलती कब हुई ), तो मान लिया |

मैं अपना sense of  purpose  कहाँ से drive  करती हूँ, और किसी नई चीज़ की शुरुआत कैसे करती हूँ, ये अलग पोस्ट्स का विषय है | फिर कभी :)

डिस्क्लेमर - मैं सिर्फ अपने जीवन के अनुभव और जो मैंने सीखा उसके आधार पर जीवन कौशल, लाइफ स्किल्स, आदि की बात करती हूँ | ये सब सीखने के बहुत से तरीके हैं, कृपया अपनी और मेरी ऊर्जा, सही क्या है, गलत क्या है कि डिबेट में व्यर्थ न करें | अच्छा लगे सीख लें, न अच्छा लगे, आगे बढ़ जाएं | नए विषयों से सम्बंधित प्रश्न हों जिन पर आप का मन हो कि मैं कुछ विचार करूँ, तो फॉर्म का लिंक पोस्ट के अंत में है, वहां अपने प्रश्न पोस्ट कर दें, मैं किसी पोस्ट में यथासंभव विस्तार और ईमानदारी से उत्तर दूँगी | इनबॉक्स में जवाब नहीं देती |

©Anupama Garg 2022

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Saturday, 19 February 2022

क्या पोर्न देखना नार्मल है ?

 #sexuality_notes_by_anupama – 12
 - क्या पोर्न देखना नार्मल है ?
हाँ | महिलाओं के लिए भी, और पुरुषों के लिए भी | 


 - तो फिर पोर्न को ले कर इतना डिबेट क्यों है ?
क्योंकि हम hypocrites  हैं | हम पोर्न देखते भी रहना चाहते हैं और हम उसकी बुराई करके महान, पवित्र, ब्रह्मचारी बने रहने का ढोंग भी करते रहना चाहते हैं | 


 - पोर्न से सम्बंधित प्रोब्लम्स क्या हैं ?
वही, जो किसी भी मार्किट से सम्बंधित होती हैं | बहुत सारा पोर्न शोषण कर के बना होता है |
पोर्न unrealistic  होता है, क्योंकि बाज़ार की खपत के लिए बना है, और पुरुष महिलाओं से अधिक खर्च करने की क्षमता रखते हैं इसलिए अधिकतर पोर्न पुरुषवादी दृष्टिकोण से सेक्स को दिखाता है | जो कि स्वस्थ तरीका नहीं है |
पोर्न को ले कर कानून बहुत लचर हैं, इसलिए पोर्न बहुत आसानी से हासिल किया जा सकता है | वे लोग भी जो बेहतर खाना अफोर्ड  नहीं कर पते, पोर्न क्लिप्स की पेन ड्राइव या CD  खरीद पाते हैं |
पोर्न का सबसे बड़ा प्रॉब्लम - चाइल्ड पोर्नोग्राफी | सेक्स का कोई भी आयाम व्यक्तिगत चॉइस कह के जस्टिफाई किया जा सकता है - लेकिन शोषण जस्टिफाई नहीं किया जा सकता, किसी भी कीमत पर नहीं | विशेष तौर पर बच्चों का, मानसिक रूप से अस्वस्थ, या शारीरिक रूप से असमर्थ व्यक्तियों का | 


 - पोर्न ban करना समाधान क्यों नहीं है?
क्योंकि पोर्न के लिए कोई स्ट्रक्चर्ड नियम कानून बनाने के लिए साइकोलॉजी, सोशल स्टिग्मा, बाजार, जेंडर, उम्र, सेक्सुअलिटी, IT, कानून, बहुत सारे आयाम देखने होंगे, इसलिए, आलस कर के पोर्न साइट्स ban कर देना एक आसान और सरल उपाय है | Hypocrisy is always easier than owning up and cleaning your shit. 


 - उपाय क्या हैं?
कई सारे suggestions हैं | सब implementation  की नीयत पर निर्भर हैं | लेकिन जब तक सेक्स के बारे में बात नहीं होगी, जब तक सेक्स, मास्टरबेशन,सेक्सुअल सेफ्टी, consent, ज़िम्मेदारी की बातें normalize  नहीं होंगी, तब तक आप कुछ भी कर लें, कुछ नहीं बदलेगा |

डिस्क्लेमर - मेरी वॉल पर सेक्स और सेक्सुअलिटी के सम्बन्ध में बात इसलिए की जाती है कि पूर्वाग्रहों, कुंठाओं से बाहर आ कर, इस विषय पर संवाद स्थापित किया जा सके, और एक स्वस्थ समाज का विकास किया जा सके | यहाँ किसी की भावनाएं भड़काने, किसी को चोट पहुँचाने, या किसी को क्या करना चाहिए ये बताने का प्रयास हरगिज़ नहीं किया जाता | ऐसे ही, कृपया ये प्रयास मेरे साथ न करें | प्रश्न पूछना चाहें, तो वॉल पर पूछें, या फिर पहले कमेंट में गूगल फॉर्म है, वहां पूछ सकते हैं | इन पोस्ट्स को इनबॉक्स में आने का न्योता न समझें |
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Sunday, 13 February 2022

क्यों होता है एक से अधिक लोगों के प्रति सेक्सुअल आकर्षण ?

 #sexuality_notes_by_anupama – 11

आज की पोस्ट उन सब लोगों के लिए है, जो polyamory या एक से ज़्यादा साथियों के प्रति अट्रैक्शन, या उनके साथ रिलेशनशिप को ले कर उहापोह में रहते हैं | ये प्रश्न अलग अलग तरीके से पूछा जाता है, बार बार पूछा जाता है, मर्दों और औरतों दोनों के द्वारा पूछा जाता है, अलग अलग परिपेक्ष्य में पूछा जाता है | इसलिए इसकी बात करना ज़रूरी है |

सबसे पहले ज़रा जानते हैं polyamory  होती क्या है | पॉलीमोरी का अर्थ है 'बहुप्रेमी प्रथा' किसी व्यक्ति के एक साथ कई प्रेमसम्बन्ध होना, या एक साथ एक से ज़्यादा प्रेमसंबंध रखने की इच्छा होना |  शाब्दिक रूप से या etymologically यह शब्द दो शब्दों से मिल कर बना है - ग्रीक मूल "पॉली" (जिसका अर्थ है "कई") और लैटिन मूल "एमोरी" (जिसका अर्थ है "प्रेम") | Polyamory  एक जेंडर न्यूट्रल शब्द है जिसे महिलाओं, पुरुषों, या queer  persons  सभी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है |

इस शब्द से मिलता जुलता एक और शब्द है - Polygamy  यानि 'बहुविवाह' | यदि कोई पुरुष एक से अधिक पत्नियां रखे तो उसे polygyny  कहेंगे और यदि कोई महिला एक से अधिक पति रखे तो उसे polyandry  कहेंगे | इन परिभाषाओं के कुछ उदाहरण हमें धार्मिक ग्रंथों में मिलते हैं | उन्हें उद्धृत करने का उद्देश्य सिर्फ़ ऐसे उदाहरण देना है जिनसे हम सामान्यतः वाक़िफ़ हैं | इन उदाहरणों का उद्देश्य भावनाओं को आहत करना नहीं है |

इन परिभाषाओं के अनुसार यदि हमें हिन्दू महाकाव्यों में उदाहरण देखने हों तो महाभारत में तीनों ही उदाहरण मिल जाते हैं | इस नज़र से महाराज पाण्डु, अर्जुन,  polygynous थे, महारानी द्रौपदी polyandrous, तथा ब्रज की कुछ गोपियाँ polyamorous, और श्रीकृष्ण polyamorous भी, और polygynous भी थे| ऐसे और ग्रंथों में और भी कई उदाहरण मिल जायेंगे |  इसी तरह मुस्लिम धर्म में मुहम्मद साहब की एक से अधिक पत्नियों का होना उन्हें polygynous  बनाता है |

अब वापस आ जाते हैं आज के परिपेक्ष्य पर | यदि ध्यान से देखें तो Polyamory और polygamy  के बीच प्रमुख अंतर, सामाजिक स्वीकार्यता का है | क्योंकि विवाह एक सामाजिक तौर पर स्वीकार्य संस्था है, इसलिए, कुछ धर्मों, समुदायों, देशों, में polygamy  स्वीकार्य है | लेकिन polyamory  यानि सिर्फ एक से ज़्यादा साथियों के साथ सम्बन्ध होना (विवाहेतर भी हो सकते हैं ऐसे सम्बन्ध), अधिकतर समाजों में आज भी अस्वीकार्य है |

ऐसे में इसे देखने का एक आयाम ये भी हो सकता है कि क्या पुरुषों का polyamorous या polygamous  होना महिलाओं की, या queer persons की तुलना में अधिक स्वीकार्य है ? लेकिन इस पोस्ट के लिए, हम polyamory  के धार्मिक, सामाजिक, या कानूनी पहलू नहीं देखेंगे | आज की पोस्ट का उद्देश्य सिर्फ ये डिसकस करना है कि polyamory  क्या है, और क्या नहीं है, तथा लोग एक से अधिक पार्टनर्स की इच्छा क्यों करते हैं |

Polyamory और उसे प्रैक्टिस करने वाले लोगों को लेकर बहुत से मिथक हैं | मसलन -

  • Polyamorous लोग सिर्फ सेक्स चाहते हैं, वे प्रेम नहीं कर सकते |
  • Polyamory का अर्थ चीटिंग है |
  • Polyamorous लोग चरित्रहीन होते हैं |
  • Polyamorous लोग ग्रुप सेक्स, स्विंगिंग, आदि भी करते हैं |
  • Polyamorous लोग commit नहीं कर सकते |
  • Queer या LGBTQIA + लोग स्ट्रैट लोगों से अधिक polyamorous होते हैं |
  • सभी polyamorous  लोग polygamous  भी होते हैं |

एक शब्द में, इन सब मिथकों के लिए इतना कहना भर काफी है कि ये सिर्फ मिथक हैं, सच्चाई नहीं | लेकिन अगर थोड़ा गहराई में देखें तो हम समझ पाएंगे कि polyamory नेचुरल है, चाहे नार्मल भले ही न लगे | जीव जगत में बहुत सी प्रजातियां हैं जहाँ poly  बिहेवियर देखने को मिलता है | उनमें से कई प्रजातियां लम्बे और स्थायी सम्बन्ध नहीं बनती, और सिर्फ प्रजनन के समय साथी ढूंढती हैं, कुछ प्रजातियां लम्बे, स्थायी सम्बन्ध भी बनाती हैं | इसका एक मतलब साफ़ है कि एक से अधिक साथी की चाह अप्राकृतिक तो नहीं है | ये कोई भटकाव, उलझन, ‘कमाल की बात', भूख, अतृप्ति, आदि नहीं है |

जहाँ तक सामान्यता का प्रश्न है, evolutionary  psychology  पढ़ते समय ये देखने को मिलता है, कि मनुष्य के लिए क्या सामान्य है, ये बहुत सी बातों पर निर्भर करता है | उसके आस पास का माहौल, उसकी परिस्थितियाँ, उसका सामाजिक ढांचा, और भी बहुत कुछ | हमें ये भी देखना होगा कि किस समाज में औरतों की स्थिति क्या है, सेक्स को ले कर कितनी और कैसी भ्रांतियां हैं, पारिवारिक, और वैवाहिक ढांचे कैसे हैं, तथा, वहां का कानूनी ढांचा किस चीज़ से प्रभावित हुआ है |

किसी भी देश में civil लॉ है या common  लॉ, या religious लॉ, ये तो एक बात है, दूसरी बात ये भी है, कि जब पूर्ववर्ती औपनिवेशिक राज्यों में नियम कानून बने, तो उन पर किस विचारधारा, किस धर्म, किस प्रकार की नैतिकता, दर्शन आदि का प्रभाव अधिक पड़ा | ये प्रभाव बहुत हद तक निर्धारित करेंगे कि लोग सेक्स, संबंधों, विवाह, और ऐसे अन्य अनेक मुद्दों से कैसे डील करेंगे |

इसके बाद ये भी देखना होगा कि हम शादी, और सेक्स को एक दुसरे के पूरक की तरह देखते हैं या नहीं | यदि हाँ तो हम polygamy  को शायद फिर भी समझ पाएं, polyamory  को नहीं समझ पाएंगे | इसी तरह यदि हम संस्कार और निष्ठा की कीमत पर आज़ादी और स्वतंत्रता की बलि चढ़ाएंगे, तो हमारे लिए ये समझना मुश्किल होगा कि polyamory सेक्सुअल, इमोशनल, सोशल स्पेक्ट्रम पर एक विशिष्ट प्रकार का व्यवहार सिर्फ़ इसलिए है क्योंकि हम उसके प्रति सहज नहीं हैं |

हमें polyamory, queer persons और पुरुषों में अधिक इसलिए दिखती है, क्योंकि हमने नैतिक अवधारणाओं में queerness  या LGBTQIA+ को अनैतिक, अप्राकृतिक आदि समझा हुआ है, और महिलाओं की सेक्सुअलिटी को परदे के पीछे दबा-छुपा कर रखा हुआ है | हमें polyamory  का मतलब cheating  या चरित्रहीनता इसलिए लगता है क्योंकि हमने नैतिकता के पैमानों में ईमानदारी को नीचे, और सामाजिक स्वीकार्यता को ऊपर रखा हुआ है |

Polyamory का अर्थ ये नहीं कि किसी को सेक्स ही चाहिए | इसका मतलब ये भी नहीं कि वे अपने एक पार्टनर से असंतुष्ट हैं या प्रेम नहीं करते | इसका अर्थ ये भी हो सकता है, कि कुछ लोग एक से अधिक लोगों से प्रेम कर सकते हैं, उसे निभा पाते हैं, बिना झूठ-साँच किये, और ऐसा करना भी चाहते हैं | Polyamory  में जो सबसे ज़रूरी चीज़ है, वो है नैतिकता, ethics | Polyamory तभी निभाई जा सकती है जब consent  और communication पर पूरा ज़ोर दिया जाये | रिलेशनशिप में जितने भी लोग शामिल हैं, उन सबको पता हो कि वे इकलौते साथी नहीं हैं, और उसके बावजूद उनकी रज़ामंदी हो |

सारे polyamorous लोग विवाह नहीं करना चाहते, लेकिन ये इसलिए नहीं है कि वे commitment  से डरते हैं, या भागते हैं | ये इसलिए भी है, कि कानूनी तौर पर polyamory  प्रैक्टिस करने का कोई ऑप्शन उन्हें न दे कर, इस समाज ने उनके लिए विवाहित होते हुए एक से अधिक लोगों से प्रेम करने का रास्ता ही बंद कर रखा है | विवाह का प्रेशर किसी भी polyamorous व्यक्ति का दम कितना घोट सकता है इसकी कल्पना करना भी कभी कभी मुश्किल है | ये ऐसी चीज़ है जैसे किसी मीट खाने वाले का विवाह किसी वैष्णव, या जैन परिवार में हो जाये |

सभी polyamorous लोग सिर्फ सेक्स नहीं चाहते | रिलेशनशिप्स के कई फ़्रेमवर्क्स होते हैं | अलग अलग लोगों की रिलेशनशिप नीड्स अलग अलग होती हैं | लेकिन इस पर विस्तार से बात करने के लिए हमें प्रेम, सेक्स, रिलेशनशिप्स में फर्क करना समझना और सीखना होगा | उसके बाद जब हम उसे सिंगल पार्टनर के परिपेक्ष्य  पाएंगे, तब उसे poly  के रिफरेन्स में समझना भी आसान हो पायेगा |

इसलिए अगली बार जब लगे कि ये औरत चरित्रहीन है क्योंकि इसके दो प्रेमी हैं, या ये आदमी लफंगा है क्योंकि ये लड़कियाँ घुमाता है, थोड़ा रुकें, थोड़ा सोचें | सोच कर देखें, क्या ये संभव है, कि आप polyamorous  लोगों के बारे में बिना जाने, बिना समझे, कुछ भी जजमेंट पास कर रहे हैं ? क्या ये संभव है कि इनके सभी पार्टनर्स को पता हो? क्या ये संभव है, कि सेक्स के बावजूद, या सेक्स के बिना भी, कुछ लोग एक दुसरे को बहुत चाह सकते हैं, पसंद कर सकते हैं, और कि ये नार्मल या कम से कम प्राकृतिक तो बिलकुल हो सकता है ?

मैं ये नहीं कह रही कि सबको polyamorous  होना चाहिए | मैं ये भी नहीं कह रही कि polyamory  सही है या गलत | मैं उससे सम्बंधित कानून पेंच जानने का दवा तो बिलकुल भी नहीं कर रही | मैं सिर्फ ये कह रही हूँ, कि ये नैसर्गिक है, कई जगह सामान्य भी है, और ये व्यक्तिगत चुनाव है | इस तरह का जीवन जीने के लिए भी ईमानदारी और संवाद की उतनी ही, बल्कि अधिक आवश्यकता है, जितनी कि सिर्फ एक साथी के साथ जीने के लिए |

Polyamory  एक पोस्ट का विषय नहीं, इसलिए और पोस्ट्स भी आएंगी | तब तक के लिए विचार, विमर्श, प्रश्न आमंत्रित हैं |

डिस्क्लेमर - मेरी वॉल पर सेक्स और सेक्सुअलिटी के सम्बन्ध में बात इसलिए की जाती है कि पूर्वाग्रहों, कुंठाओं से बाहर आ कर, इस विषय पर संवाद स्थापित किया जा सके, और एक स्वस्थ समाज का विकास किया जा सके | यहाँ किसी की भावनाएं भड़काने, किसी को चोट पहुँचाने, या किसी को क्या करना चाहिए ये बताने का प्रयास हरगिज़ नहीं किया जाता | ऐसे ही, कृपया ये प्रयास मेरे साथ न करें | प्रश्न पूछना चाहें, तो वॉल पर पूछें, या फिर पहले कमेंट में गूगल फॉर्म है, वहां पूछ सकते हैं | इन पोस्ट्स को इनबॉक्स में आने का न्योता न समझें |

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Thursday, 10 February 2022

समलैंगिक लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप

 #sexuality_notes_by_anupama – 10

प्रश्न - मैं 33 वर्षीय समलैंगिक महिला हूँ, मैं 3 महीने से एक long distance relationship में हूँ, इसको लेकर हम commitment की हद तक seriousहैं।। इस रिश्ते से पहले मैने casual dating की थी, हमारे सिर्फ physical relation थे। पर अब भी मैं उसे miss करती हूँ, शायद महज शारीरिक संतुष्टि के लिए । पर ये गलत लगता है इसलिए कोई contact नहीं है। समझ नहीं आता क्या करूँ?

दोस्त, शुक्रिया इस प्रश्न के लिए | आपसे मुझे कुछ प्रश्न पूछने हैं, इसलिए नहीं कि मेरा आपके रिश्ते को लेकर कोई जजमेंट है, बल्कि इसलिए कि मुझे लगता है किसी भी रिश्ते की देखने के कई नज़रिये हो सकते हैं | और किसी भी long term commitment  की शुरुआत उसे अच्छी तरह जांच परख कर होनी चाहिए |

पहली बात - अपने कहा आपका रिश्ता 3 महीने से चल रहा है | लेकिन आप दोनों (हम लिखा अपने) इसे ले कर कमिटमेंट की हद तक सीरियस हैं | मुझे नहीं पता आप दोनों एक दूसरे से कैसे कहाँ मिले, एक दूसरे को कितना अच्छे से जानते हैं | लेकिन मुझे लगता है ३ महीने रिश्ते की शुरुआत करने के लिए तो काफी हो सकते हैं, लेकिन रिश्ते को ले कर सीरियस होने के लिए? मुझे ये थोड़ा unsettle करता है | हालाँकि एक सच ये भी है की arranged  marriages  वाले हमारे देश में 3 महीने बहुतों के लिए काफी होते हैं, लेकिन अगर अपने साथी को खुद चुनना है तो हड़बड़ी क्यों?

दूसरी बात - इससे पहले अपने casual  dating भी की थी, जहाँ सिर्फ physical relations थे ऐसा अपने बताया | लेकिन आप अपनी उस साथी को मिस करती हैं | वहीँ दूसरी ओर आपको ये उलझन भी होती है कि कहीं आप उन्हें महज शारीरिक सुख के कारण तो मिस नहीं करतीं, और अगर हाँ तो आपको ये गलत लगता है | यहाँ मुझे लगता है, आपको सही और गलत के नज़रिये से देखने के बजाय, ईमानदारी के नज़रिये से देखना चाहिए | शारीरिक सुख भी उतना ही आवश्यक है, जितना इमोशनल या रोमांटिक कनेक्शन | क्या ये संभव है कि अपने शुरू तो कैसुअल डेटिंग  की तरह किया हो, लेकिन बाद में एक या दोनों लोगों की भावनाएं बदल गयी हों? अगर आप दोनों एडल्ट्स हैं (जो कि मैं मान कर चल रही हूँ), और आप दोनों ने आपसी सहमति से सम्बन्ध बनाये, तो गिल्ट कैसा?

इसे आप ऐसे भी देख सकती हैं - अगर आपने किसी के साथ सम्बन्ध बनाये, और उसके बाद वे पढ़ने, या नौकरी करने किसी दूसरे देश चली गईं, तो क्या आप गिल्ट महसूस करेंगी? कहीं आप अपने grief या अपने सुख की absence को गिल्ट समझ कर कंफ्यूज तो नहीं हो रहीं?

तीसरी सबसे ज़रूरी बात - इस देश में LGBTQIA को ले कर पहले ही बहुत जजमेंट, और भ्रांतियां हैं | मैं नहीं जानती कि व्यक्तिगत तौर पर आपको कम्युनिटी का, परिवार का, allies  का, कितना सपोर्ट है | आप out  हैं या closet  में, मैं ये भी नहीं जानती | लेकिन मैं ये ज़रूर समझती हूँ कि इस देश में एक queer  पर्सन होना आसान नहीं है | आपने ये भी कहा कि ये रिश्ता लॉन्ग डिस्टेंस है | मतलब आप दोनों ने एक दुसरे के साथ बहुत वक़्त रह कर नहीं गुज़ारा है | ऐसे में मुझे लगता है, आपको ये ज़रूर देखना चाहिए कि कहीं ये रिश्ता आपका एस्केप मैकेनिज्म तो नहीं है | कहीं ऐसा तो नहीं कि एक queer person  का स्ट्रगल आपको थका रहा है, और ऐसे में आपको जो भी व्यक्ति थोड़ी भी कम्पेटिबल लगीं, आप उनसे attach हो गयीं |

मैं ये भी कहूँगी, कि व्यक्तिगत तौर पर मैं लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप्स में कोई ख़ास यकीन नहीं रखती | और सामान्य तौर पर मेरे ऑब्जरवेशन में ऐसी रिलेशनशिप्स अक्सर दिखती कुछ और हैं, होती कुछ और | लेकिन, इसका मतलब ये नहीं कि मैं आपकी रिलेशनशिप की गहराई को जज कर रही हूँ | मैं सिर्फ ये कह रही हूँ, कि एक बार अपने आप के साथ बैठ कर, अपनी लाइफ, और अपनी रिलेशनशिप नीड्स को दोबारा परखें, उन्हें चाहें तो लिख लें, एक लिस्ट बनाएं | फिर देखें कि इस लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप में आपकी कोर values  और बेसिक से थोड़ी ज़्यादा ज़रूरतें पूरी हो भी रही हैं या नहीं | अपनी पार्टनर से भी आपको ये साडी बातें करनी चाहियें, क्योंकि उन्हें इस बारे में कैसा लगता है, ये जानना, समझना, भी ज़रूरी है |

आशा है आपकी उलझन कुछ सुलझी होगी, अगर कुछ clarification  चाहें तो फॉर्म में दोबारा लिख भेजें | आपको शुभकामनाएं |

डिस्क्लेमर - मेरी वॉल पर सेक्स और सेक्सुअलिटी के सम्बन्ध में बात इसलिए की जाती है कि पूर्वाग्रहों, कुंठाओं से बाहर आ कर, इस विषय पर संवाद स्थापित किया जा सके, और एक स्वस्थ समाज का विकास किया जा सके | यहाँ किसी की भावनाएं भड़काने, किसी को चोट पहुँचाने, या किसी को क्या करना चाहिए ये बताने का प्रयास हरगिज़ नहीं किया जाता | ऐसे ही, कृपया ये प्रयास मेरे साथ न करें | प्रश्न पूछना चाहें, तो वॉल पर पूछें, या फिर पहले कमेंट में गूगल फॉर्म है, वहां पूछ सकते हैं | इन पोस्ट्स को इनबॉक्स में आने का न्योता न समझें |

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©Anupama Garg 2022

Love Notes - 1

आप जो महसूस करते हैं, वो सामने वाले का अपने प्रति प्रेम नहीं है, वो सामने वाले के अपने प्रति प्रेम की 'आपकी' समझ है | जब मैंने ये समझ लिया तो दो चीज़ें हुईं |

1. मैंने सामने वाले से पूछना शुरू किया कि वो अपनी भावनाएं बताये, उनके शब्दों में | बजाय इसके कि मैं वो समझूँ जो मैं समझ रही हूँ, ये बेहतर है कि सामने वाले को आज़ादी रहे वो समझाने की, जो वो समझाना चाहता है | इसमें सामने वाले की भाषायी या अभिव्यक्ति की सीमितता से कभी कभी जूझना पड़ सकता है, लेकिन अगर उतना पेशेंस भी न हो तो प्रेम सम्बन्ध बनाने ही क्यों हैं, किसी के साथ?
2. मैंने ये शुरुआत से ही ये बताना शुरू कर दिया कि किसी रिश्ते में मुझे क्या चाहिए | ये बता दूँ, कि ये आसान नहीं है, अब भी, इतने सालों बाद भी | पुराने रिलेशनशिप्स की ट्रॉमा, सामने वाले के बैगेज के प्रति बेसिक सेंसिटिविटी, इमोशंस को overanalyze करने से उपजने वाली 'ये तो मैकेनिकल है' की भावना |
ओह, और इस सब के साथ बाज़ार से भी तो जूझना होता है | रोज़ डे, प्रोपोज़ डे, चॉकलेट डे, अलाणा डे, फलाणा डे, रिलेशनशिप कार्ड्स, सेल्फ लव, प्रेम तो चाहिए ही, अकेलापन हैल्थी नहीं है, और क्या क्या नहीं | इस सारी subconscious messaging , कंडीशनिंग से भी तो जूझना है न |
प्यार क्या है, भले एक धेला न पता हो | प्यार, infatuation, desparation, प्रतिबद्धता, सेक्स, डिजायर, प्लेजर में भले राई से रत्ती का फर्क न पता हो हमें, चाहे कंसेंट का 'क' न आता हो, 'न' सुनने की, 'न' कह पाने की कौड़ी बराबर अकल न हो, लेकिन रिलेशनशिप तो चाहिए, क्योंकि समाज में फिट भी तो होना है |
I Love you जिनसे बोलना चाहिए, उनसे तो बोल पाते नहीं हम लोग, ईमानदारी से बोल नहीं पाते, और फिर जादू की उम्मीद करते हैं | इसलिए, एक बार प्रेम की पींगें बढ़ने से पहले ईमानदारी से देख समझ लें कि प्यार चाहिए, या सिर्फ माहौल से उपजी डेस्परेशन है | बाकि तो valentine वीक का जलवा कायम है ही | :)

©Anupama Garg 2022

#मन_के_गहरे_कोनों_से - 20 #lovenotes_anupama #अनुपमा_आपबीती_जगबीती

Monday, 7 February 2022

सेक्स को अधिक संतुष्टिप्रद या आनंददायक कैसे बनाया जाये?

 #sexuality_notes_by_anupama – 9

सो बीच में Covid हुआ, writers' ब्लॉक भी हुआ, दोस्तों के साथ डिसकशंस हुए, लिखने का मन नहीं किया, इसलिए कोई पोस्ट नहीं आई आप तक | ऐसा संभव है कि ऐसा फिर दोबारा हो, लेकिन प्रश्नों के उत्तर मैं देती रहूंगी, और लगातार लिखती भी रहूंगी | सो, आज सेक्स के एक प्रैक्टिकल मुद्दे के बारे में | मेरे पास कई प्रश्न आये हैं, जहाँ पूछा गया कि साथी की इच्छा नहीं होती, क्या करूँ? साथी को सिर्फ अपना pleasure  मिल जाता है, उसके बाद मेरी उत्तेजना पूरी तरह संतुष्ट नहीं हो पाती, क्या करूँ आदि |

इसका दो शब्दों में तो उत्तर हो सकता है संवाद और experiment  | लेकिन मैं ये अच्छी तरह जानती हूँ, व्यक्तिगत तौर पर भी, और देख सीख कर भी, कि ये हमेशा आसान नहीं होती | अपने आप को बहुत सुलझा हुआ समझने वाले लोग भी कभी कभी polyamory  को भटकन समझ सकते हैं, BDSM को हिंसा, और सेक्स के बारे में संवाद को बेशर्मी | सुलझे हुए लोग भी awkward  हो सकते हैं | और सुलझे हुए लोगों को चीज़ें try  करना अच्छा लगता ही हो, ये भी ज़रूरी नहीं | कुछ लोगों को सिर्फ दाल रोटी चाहिए, कुछ को बिरयानी, और कुछ को 56 भोग | ऐसे में मेरा साधारण सा 2 शब्दों का उत्तर practically किसी काम का नहीं है, ये भी मैं समझती हूँ | इसलिए कई चीज़ों की बात करेंगे | इन में से एक चीज़ है फोरप्ले और आफ्टरप्ले  (foreplay and afterplay )

क्या है फोरप्ले और आफ्टरप्ले ?
इंटरकोर्स या सम्भोग से पहले किया जाने वाली कोई भी यौन क्रिया फोरप्ले कहलाती है, और उसके बाद की जाने वाली यौन क्रिया जैसे चुम्बन, आलिंगन, यहाँ तक कि बातें भी | कभी कभी फोरप्ले को 'outercourse' भी कहा जाता है, और आफ्टरप्ले को 'pillowtalk' भी कह दिया जाता है | लेकिन फोरप्ले और आफ्टरप्ले सिर्फ़ सेक्स और उत्तेजना के दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि रिश्ते में हर तरह से आत्मीयता बढ़ाने में भी सहायता करते हैं, फिर चाहे वो भावनात्मक सम्बन्ध हों, या शारीरिक और यौन संबंध |

फोरप्ले और आफ्टरप्ले दोनों की अलग अलग योगदान है | फोरप्ले उत्तेजना बढ़ने में सहायक है, जिसके कारण सेक्स ज़्यादा आनंददायी हो सकता है | फोरप्ले एक दूसरे के शरीर की समझ बढ़ाता भी | फोरप्ले से आप ये समझ पाते हैं कि आपके साथी को कैसा स्पर्श आनंद देता है, कैसा स्पर्श उत्तेजित करता है, और कैसा स्पर्श उन्हें असुविधा महसूस करवाता है | जैसे कुछ लोगों को हलके स्पर्श अच्छे लगते हैं, कुछ लोगों को हलके स्पर्श से बेचैनी हो जाती है | कुछ लोगों को अपने साथी की मज़बूत पकड़ उत्तेजित कर सकती है, वहीँ दूसरों को उसके कारण भय या कोई पुराना ट्रामा (कई बार अवचेतन भी) ट्रिगर हो सकता है |

लेकिन अगर फोरप्ले कभी हुआ ही नहीं, तो इन बातों के बारे में कभी कुछ पता भी नहीं चलेगा | और ऐसे में सेक्स का मतलब बस इतना ही रह जाता है कि - लाइट बंद कर के, मैथुन कर लो, इंटरकोर्स कर लो, पुरुष का स्खलन हो जाये, और करवट बदल के सो जाओ | लेकिन ऐसे सेक्स में आत्मीयता कहाँ है ?

इसी तरह फोरप्ले से शारीरिक बदलाव भी आते हैं | पुरुष का hardon , महिला की योनि में स्त्राव, ये सब ऐसे बदलाव हैं, जो सेक्स को कम तकलीफदेह या अधिक आनंदप्रद बनाते हैं | लेकिन इन सब चीज़ों के लिए फुर्सत निकालनी पड़ती है, अपने साथी के बारे में सोचना पड़ता है | हड़बड़ी में सेक्स करना वैसे ही है जैसे दाल भात ठूंस कर भकोस लेना | वहीँ फोरप्ले और आफ्टर प्ले ऐसे है जैसे आपको खाने से पहले कोई एक ग्लास जलजीरा पिलाये, फिर थोड़ा salad दे, उसके बाद आप दाल चावल आराम से अचार पापड़ वगैरह के साथ खाएं | और खाना खा कर एक ग्लास आम पन्ना, या छाछ, या कोई मिठाई खाएं |

फोरप्ले और आफ्टरप्ले से एक और जो महत्त्वपूर्ण बात होती है, वो है एक दूसरे के शरीर के प्रति असहजता ख़त्म होना | सच तो ये है कि वक्ष का साइज, लिंग का साइज, और ऐसी अनेकों भ्रांतियाँ सिर्फ इसलिए फैली होती हैं, क्योंकि हम में से अधिकतर लोग, रोमांटिक या सेक्स के सन्दर्भ में नग्न मानव शरीर सिर्फ पोर्न में देखते हैं | और हम सबको पता है कि हम में से अधिकतर ने किसी मॉडल, पोर्नस्टार, या परफेक्ट 36 - 24 - 36 साइज की महिला, या 9 इंच लम्बे लिंग वाले पुरुष को अपना साथी नहीं चुना होता है |

सच तो ये है कि पोर्न व्यावसायिक है, और इसलिए पोर्न उतना ही अवास्तविक और कपोलकल्पित है, जितना आपका रोज़ हर बार खाने में 4 रसमलाई खाना | यथार्थ ये है, कि हम में से अधिकतर लोग कभी अपनी कपोल कल्पना के परे जा कर, अपने साथी का शरीर, अपना खुद का शरीर एक्स्प्लोर ही नहीं करते | हमें फुर्सत ही नहीं कि मूड बनाने के लिए हम अपनी बाकि इन्द्रियों को भी काम में लें | स्पर्श, सुगंध, स्वाद, संगीत, सब को छोड़ कर, हम सिर्फ और सिर्फ क्या सामने दिखता है पर फोकस करने लगते हैं | ऐसे में सेक्स से संतुष्टि मिले भी कैसे?

जो लोग फोरप्ले के बारे में समझते भी हैं, उन्हें भी कुछ गलतफहमियाँ सामान्य तौर पर रह जाती हैं | जैसे हर किसी के लिए फोरप्ले का मतलब अलग अलग हो सकता है | कुछ के लिए अपने साथी के साथ डर्टी टॉक्स उत्तेजनाप्रद होती हैं, कुछ के लिए कैंडल लाइट्स, कुछ के लिए kisses, डिनर, ड्रिंक्स, रोलप्ले, या कुछ और |  ऐसे ही स्पर्श के कई तरीके हो सकते हैं | कोई मसाज देना छह सकता है, किसी को मसाज करवाने में ज़्यादा रिलैक्स्ड महसूस होता है |

इसी तरह कुछ लोगों को ये ग़लतफ़हमी होती है कि फोरप्ले हो तो सेक्स होना ही चाहिए, ये भी कोई ज़रूरी नहीं |कई बार फोरप्ले अपने आप में ही काफी होता है | एक सामान्य भ्रान्ति है कि फोरप्ले में toys का इस्तेमाल करना मतलब साथी में कोई कमी है | ऐसे में मेरा मानना ये है, कि पापड़ खाने का मतलब ये नहीं कि दाल चावल में स्वाद नहीं है | पापड़ सिर्फ एक और चीज़ है जो आपकी स्वादेन्द्रिय को एक और स्वाद चखाती है |

सब लोग फोरप्ले करने में कम्फर्टेबल या सहज नहीं होते | अगर आपको या आपके साथी को फोरप्ले या आफ्टरप्ले में झिझक महसूस होती है तो आपको ये समझने की ज़रूरत है कि ये असहजता क्यों है | क्या ये इसलिए है, कि आप आलसी हैं, या आपको कॉन्फिडेंस नहीं है, या आपको लगता है कि कहीं आप जज न किये जाएं, या इसलिए कि अपने कभी कर के देखा नहीं ? चाहे जो भी कारण हों, सच ये है, कि आपके और आपके साथी के आनंदप्राप्ति की ज़िम्मेदारी आप ही दोनों की है, इसलिए जब तक कोशिश नहीं कर के देखेंगे, तब तक पता चलेगा भी नहीं | सेक्सुअल एक्सपेरिमेंट की आदत न होने का बहाना वैसे ही है, जैसे कोई कहे, बचपन में मेरी माँ मेरा लंगोट बदलती थी, इसलिए मुझे आदत नहीं अपना कच्छा खुद पहनने की |

फोरप्ले या आफ्टरप्ले के बारे में और भी बहुत कुछ लिखा जा सकता है, टिप्स भी दिए जा सकते हैं लेकिन, बात का मूल सार सिर्फ इतना कि धीरे धीरे, प्यार से, अपने साथी की पसंद जानने की कोशिश करें, अपनी पसंद उन्हें बताएं, बिना थोपे बिना जज किये, जो चीज़ें दोनों को पसंद हों, उन्हें कर के देखें, और आपको अपनी सेक्स लाइफ में खुद ही फर्क दिख जायेगा |

डिस्क्लेमर - मेरी वॉल पर सेक्स और सेक्सुअलिटी के सम्बन्ध में बात इसलिए की जाती है कि पूर्वाग्रहों, कुंठाओं से बाहर आ कर, इस विषय पर संवाद स्थापित किया जा सके, और एक स्वस्थ समाज का विकास किया जा सके | यहाँ किसी की भावनाएं भड़काने, किसी को चोट पहुँचाने, या किसी को क्या करना चाहिए ये बताने का प्रयास हरगिज़ नहीं किया जाता | ऐसे ही, कृपया ये प्रयास मेरे साथ न करें | प्रश्न पूछना चाहें, तो वॉल पर पूछें, या फिर पहले कमेंट में गूगल फॉर्म है, वहां पूछ सकते हैं | इन पोस्ट्स को इनबॉक्स में आने का न्योता न समझें |
©Anupama Garg 2022

Thursday, 27 January 2022

बच्चों को सेक्स के बारे में कब बताना शुरू करें ? – भाग 1

 

#sexuality_notes_by_anupama – 8

ये प्रश्न एक माँ ने पूछा है, लेकिन इसका उत्तर अधिकतर पेरेंट्स पर अप्लाई करेगा | आपको अपने घर, अपनी परिस्थितियों, अपने पेरेंटिंग पैटर्न्स, और अपने बच्चे की नीड्स के हिसाब से कुछ बदलाव करने पड़ सकते हैं | इस प्रश्न का उत्तर लम्बा भी है, इसलिए इसे दो या तीन भागों में लिखूंगी | पहला भाग ये रहा, बाकी भाग अगली पोस्ट्स में |

पहली चीज़ - मेरा अनुभव सिर्फ मित्रों के बच्चों से कभी कभार 'sex  ed  talk ' या 'वो वाली बात' करने तक सीमित है | मैं माँ नहीं हूँ, इसलिए मेरा उत्तर अध्ययन, और दूसरे एक्सपर्ट्स के अनुभवों पर ज़्यादा आधारित है | अगर आपको ये उत्तर सिर्फ एक माँ बन चुकी महिला से ही चाहिए, तो आप यहीं पढ़ना बंद कर सकते हैं |

दूसरी बात - अपने बच्चे को कब बताएं से ज़्यादा ज़रूरी सवाल है, अपने बच्चे को क्या और कैसे बताएं | आजकल बच्चों के पास जिस तरह सूचना की अधिकता, इंटरनेट की सुविधा, TV और अन्य मीडिया से मिल रहे अधकचरे ज्ञान की भरमार है, उनके सवाल, उनकी उत्सुकता, बहुत ही सामान्य है | ऐसे में बजाय उन्हें एक समय तक अनभिज्ञ रखने के, हमें इस बारे में सोचना चाहिए कि हम उन्हें उनकी आयु के हिसाब से क्या, कितना, और कैसे बताएं |

आप का सबसे पहला काम होना चाहिए कि आप खुद सेक्स के बारे में जानें, सीखें, और उसके बारे में स्वस्थ संवाद करने की आदत डालें | जब तक आप सेक्स सम्बन्धी संवाद को ले कर awkward  रहेंगे, तब तक आप बच्चे के साथ भी यह संवाद आराम से नहीं कर पाएंगे |

बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं, और वो असहजता, झूठ, टालमटोल को तुरंत भाँप लेते हैं | इसलिए उन्हें ये भरोसा होना ज़रूरी है कि उनके सवाल टाले नहीं जा रहे, और उनसे झूठ नहीं बोला जा रहा | आप माता-पिता के तौर पर अपने बच्चे को ये भरोसा तब तक नहीं दिला पाएंगे जब तक आप खुद इन कॉन्सेप्ट्स को ठीक से नहीं समझेंगे, व सेक्स और यौन स्वस्थ्य को ले कर एक सहज, स्वस्थ दृष्टिकोण विकसित नहीं करेंगे |

सहजता की शुरुआत आप यौनांगों को उनके नामों से बुलाने से कर सकती हैं ! आप आँख को 'मिचमिच' नहीं कहतीं तो फिर योनि या vagina  को 'नीचे', 'उधर', 'सुसु की जगह' क्यों कहती हैं, जबकि आप शायद जानती हैं, कि महिलाओं के शरीर में योनि, और मूत्रमार्ग अलग अलग हैं ? फिर आप लिंग या Penis को 'नन्नू' 'पीपी' क्यों बुलाएँगे, जब आप कान को 'खुसखुस' और गले को 'फुसफुस'  नहीं कहते?

मैं ये बिलकुल समझती हूँ कि शायद आप अपने बच्चे को 'योनि' और 'लिंग' जैसे शब्द न सिखाना चाहें, विशेषतौर पर इसलिए कि हिंदी में बोले जाते समय इन शब्दों के प्रति हमारी अपनी conditioning हमें असहज बनाती है, लेकिन ऐसे में आप इन अंगों के अंग्रेज़ी नामों का उपयोग कर सकते हैं | हमारी प्राथमिकता हमारे बच्चों की सहजता, उनकी समझदारी होनी चाहिए, भाषाई शुद्धता नहीं |

तो ये है पहला स्टेप | अंगों को उनके नाम से बुलाएं, ताकि सहजता की नींव शुरू से ही पड़े | अब अगला स्टेप  - इस संवाद की शुरुआत कैसे करें ? एक तरीका है कि आप अपने बच्चे के सवालों का इंतज़ार करें | आम तौर पर यदि आपका बच्चा 3 साल से बड़ा है, तो वो आपको या किसी अन्य महिला को प्रेगनेंसी में देखेगा | या तो उसे पता होगा कि उसका कोई भाई-बहन आने वाला है, या ये कि फलां आंटी के घर बेबी आने वाली है | उस उम्र में एक बहुत ही सामान्य सवाल होता है - बेबी कहाँ से आते हैं ?

ऐसे सवालों के जवाब माँ बाप अक्सर बहुत ही अजीब तरीके से देते हैं - भगवान जी के घर से, मंदिर से, हॉस्पिटल से, और पता नहीं कहाँ कहाँ से | आपके बच्चे की उम्र अगर 3 साल है तो आप कह सकते हैं, कि बेबी माँ के शरीर में बनते हैं, और अगर आपके बच्चे की उम्र 13 साल है तो आप कह सकते हैं कि माँ के शरीर में एक sac  या थैली होती है जिसे uterus  (गर्भाशय) कहा जाता है, और बेबी उसमें बनते हैं | इसके बाद संभव है कि आपका बच्चा आगे सवाल न पूछे और ये भी संभव है कि पूछ बैठे कि ये बेबी बनते कैसे हैं ?

आप कह सकती हैं, कि जब लोग बड़े हो जाते हैं, मम्मी पापा बनने के लायक शारीरिक, मानसिक, सामाजिक, और आर्थिक स्थिति में आते हैं, तो मम्मी-पापा, महिला पुरुष, आपस में, या डॉक्टर की सहायता से उस बेबी के बनने का प्रोसेस शुरू करते हैं | इस स्टेज पर डॉक्टर की बात करने या न करने का निर्णय आप बच्चे की आयु, या उसके प्रश्न की भाषा, या IVF / surrogacy का उसके प्रश्न से कितना सम्बन्ध है, इस आधार पर ले सकते हैं |

कभी कभी 10 - 12 साल के बच्चे भी कोई लेख, कोई पत्रिका, कोई वेबसाइट पढ़ कर पूछ सकते हैं, मम्मी surrogacy  क्या है, या पापा िवफ क्लिनिक क्या होती है | कभी कभी छोटे लड़के सेनेटरी नैपकिन देख कर पूछ सकते हैं ये क्या है, क्यों काम आता है ? जो लड़के coeducation में हैं, उन्हें तो बहुत बार स्कूल में sex ed  क्लास में, या batchmates  से पता चल जायेगा, लेकिन जो लड़के सिर्फ लड़कों के स्कूल्ज में पढ़ते हैं, उन्हें ये पता चले कोई ज़रूरी नहीं |

ऐसे में उनको डपटना, उनके सवाल टालना, उन्हें ये कहना कि ये सब फालतू की बातें हैं, या ये उनके लिए नहीं हैं लड़कियों की बातें हैं, वगैरह उन्हें छुप कर जवाब ढूंढने को प्रेरित करेगा | और ऐसे में वो क्या खोजेंगे, क्या जवाब पाएंगे, और उसका क्या असर होगा, इस पर आपका कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं होगा | 

आपका संवाद आपके बच्चे के साथ कैसा होगा ये आपके बच्चे की आयु पर, उसके सवालों पर, और आपकी सहजता पर निर्भर करेगा | ये डाउनलोड नहीं है, जहाँ आपने टीचर की तरह क्लास दे दी, और बच्चे ने सुन लिया | ये संवाद प्लान करने के बजाय इनका अपने आप से फ्री फ्लोइंग होना ज़्यादा बेहतर है, क्योंकि प्लान्स अधिकतर फेल ही होते हैं, विशेष तौर पर बच्चों के साथ |

इसलिए इस संवाद को हमेशा दोतरफ़ा रखें | अपने बच्चे से पूछें उसे क्या समझ आया | उसकी समझ को जहाँ ठीक समझें वहां सुधारें भी | उससे पूछें अगर उसके और कोई प्रश्न हैं ? उसे ये भरोसा दिलाएं कि यदि उसके दिमाग में कोई भी प्रश्न हो तो वो आपसे बताये, पूछे, और ये कि आप उसे हमेशा जवाब देंगे, चाहे उसी समय, चाहे किसी एक्सपर्ट से सीख कर | ऐसे में बच्चा न सिर्फ आपके साथ सहज हो पायेगा, बल्कि ये भी समझ पायेगा कि जब आप ये स्वीकार कर सकते हैं कि आपको सब नहीं आता, तो उसके सवालों का भी मज़ाक नहीं बनेगा, और उसे कुछ भी पूछने की psychological  आज़ादी मिलेगी |

अब आज का अंतिम बिंदु | क्या हो अगर आपका बच्चा कोई सवाल न पूछे? ऐसे में आप खुद भी ये संवाद शुरू कर सकते हैं | "बेटा, आपको पता है फलां आंटी के घर में बेबी आने वाली है?' 'आपको पता है, बेबी कैसे बनते हैं?' ये एक बहुत नार्मल संवाद होगा, ठीक वैसे ही, जैसे आप घर में फ्रिज, नई कार, या नया टीवी डिसकस, या नया शहर, पापा के नए बॉस, मम्मी की नई फ्रेंड, या किसी की बीमारी को डिसकस करते हैं | जैसे जीवन में आना वाला और कोई भी परिवर्तन, और उसके बारे में होने वाला संवाद नार्मल है, वैसे ही ये भी | बस एक बार स्वस्थ तरीके से बात शुरू हो जाये |

डिस्क्लेमर - मेरी वॉल पर सेक्स और सेक्सुअलिटी के सम्बन्ध में बात इसलिए की जाती है कि पूर्वाग्रहों, कुंठाओं से बाहर आ कर, इस विषय पर संवाद स्थापित किया जा सके, और एक स्वस्थ समाज का विकास किया जा सके | यहाँ किसी की भावनाएं भड़काने, किसी को चोट पहुँचाने, या किसी को क्या करना चाहिए ये बताने का प्रयास हरगिज़ नहीं किया जाता | ऐसे ही, कृपया ये प्रयास मेरे साथ न करें | प्रश्न पूछना चाहें, तो वॉल पर पूछें, या फिर गूगल फॉर्म है, वहां पूछ सकते हैं | इन पोस्ट्स को इनबॉक्स में आने का न्योता न समझें |

©Anupama Garg 2022

 

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