Thursday, 19 March 2015

Wo Safed Roomal - The white handkerchief


उस शाम
जब घर नहीं थी मैं
और तुम दो गाँठें
एक सफ़ेद रूमाल की
बाँध गए चुपके से
घर के ताले में?
तो मेरे मन का दुःख,
तन की व्याधि
सब अचानक बह गयी मानो परनाले में ।

 
करते क्या हो आखिर
इतने दर्द का??
जो एक ही झटके में
हर लेते हो,
आत्मा से मेरी ??
कहाँ से लाते हो
कठोर स्नेह इतना ??
कि सामने मिलने आओ न आओ,
मगर तबीयत नासाज़ होने पर
मेरे पीछे से भी दे जाते हो घर की फेरी??

और वो वाला दर्द कहाँ से लाते हो ?
जो लम्बे अरसे तक
कचोटता है मन को,
तब,
 जब तुम्हें आँखों से छूने
और कानों से पी लेने को
अस्तित्त्व का हर टुकड़ा तरसता है??

और वो वाला?
जिसे तुमसे पा कर भी,
तुमसे नफरत, गुस्सा, खीझ, पीड़ा, दुःख नहीं मिलते,
बल्कि लगता है,
कि तुम्हारा दर्द है.....
तो
मुझमें जीवन अब भी बसता है !


सुनो !
अगली बार जब आओ,
तो मेरे मिलने के बावजूद,
अपनी खुशबु से बसा तुम्हारा रूमाल फिर छोड़ जाना ।
अगली बार जब आओ,
तो
हर बार की तरह
मेरे दिमाग में कोई सवाल फिर छोड़ जाना ।।

Safed Roomaal


सुनो !
अगली बार जब - २ भी आओ
मेरे पूरे अस्तित्त्व पर
अपना भीना - महकता ख्याल फिर छोड़ जाना ।
सुनो,
अगली बार.……
थोड़ा जल्दी आना,
अगली बार........
मेरे सामने आना !

आओगे न ???



That dusky evening,
I wasn't around,
to the two knots of the handkerchief,
that you tied around the lock,
I'm still bound.
All misery,illness,
it left me all..
at the drop of a hat,
and now I feel sound.

Afterall, what do you with such pain?
one that you absorb from my soul?
Where do you find the stern disciplinary love from?
that whether or not you meet me,
you make sure to visit my door even behind me,
when I feel un-whole.

And pain, of that type...
which gnaws at my heart
and wrenches me,
when my eyes crave to devour you,
and my ears
crave to drink !
And when every ounce of my being,
craves for you,
driven to the edge and the brink?

And THAT?
Which comes from you
and still doesn't make me miserable,
but causes realization to dawn upon me.
It is this pain that
makes my heart soar,
this pain
that lets me be???

Hear me if you will,
whenever you visit me next,
despite meeting me,
leave me a handkerchief,
soaked in you...
Next time when you arrive,
leave for me a question,
and also its cue...
Whenever you come next,
every time you come again,
sprinkle your being,
your essence on me,
my individuality.

And
come soon...
next time,
let me see you, my moon.
Please???

©Anupama Garg 2015 March