Tuesday, 18 January 2022

कौन हैं आप? Who is Anupama?

 

आज की पोस्ट बिलकुल अलग है | इस बारे में कुछ दोस्तों ने पहले कभी कभी पूछा है, और मैंने कभी जवाब दिया, कभी टाल दिया है लेकिन बीते  दिनों में इसे लिखने की बहुत ज़रूरत महसूस हुयी है | अभी विशेष तौर पर जब  लोग मुझसे जुड़े हैं तो मुझे लगता है, सभी का थोड़ा सा expectation management  ज़रूरी है | इस तरह आपको मेरे और इस वॉल के बारे में कोई ग़लतफ़हमी नहीं रहेगी और हमारे बीच तल्खियों के मौके थोड़े कम आएंगे | तो शुरू  करते हैं :

1.       कौन हैं आप?

मैं एक स्त्री हूँ, मैं भारतीय हूँ, भारत में ही रहती हूँ, दिल्ली और अजमेर के बीच | मेरा पेशा है strategy,  research,  management,  और लेखन | ये काम मैं बहुत से विषयों, और बहुत से clients  के लिए करती हूँ | इसके अलावा मैं शौकिया गायन करती हूँ (मैंने संगीत की १३ वर्ष नियमित शिक्षा पायी है, और मैं पिछले बहुत वर्षों से अनियमित किन्तु अभ्यास करने  की कोशिश करती हूँ )  |

2.       क्या आप शादीशुदा हैं ? आपने शादी क्यों नहीं की ?

पहले मौका नहीं मिला, और बाद में ज़रुरत महसूस नहीं हुयी | वैसे तो इस प्रश्न से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए, लेकिन मैं जानती हूँ कि अधिकतर लोगों की इसमें बहुत दिलचस्पी है | जी नहीं, मैं अविवाहित हूँ, तथा मेरा इस समय कोई साथी नहीं है | मैं, विवाह को ज़रूरी नहीं समझती, लेकिन मैं ये भी नहीं समझती कि  रहना चाहिए  | लोग हैं, जिनके लिए उनकी परिस्थितियों के हिसाब से विवाह एक अच्छा चुनाव हो सकता है | उनके लिए मेरी शुभेच्छाएं सदैव हैं | व्यक्तिगत मेरे लिए, विवाह तभी संभव और ज़रूरी होगा, जब मुझे मेरा मनचाहा, समझदार, सुलझा, अविवाहित पुरुष मिले, तथा, हम दोनों को वैधानिक, सामाजिक, या पारिवारिक दृष्टिकोण से विवाह करना आवश्यक लगे | सिर्फ शादी के लिए शादी, मेरे जीवन के ढांचे में फिट नहीं होती |

3.       क्या आप फेमिनिस्ट हैं ?

पता नहीं | मुझे किसी भी प्रकार के -ism , -ist  आदि से कोई विशेष फ़र्क नहीं पड़ता | न ही किसी स्कूल, किसी ढांचे में फिट होने की ख्वाहिश होती है | कुछ abstract  concepts  हैं, जिन पर मेरे जीवन मूल्यों की संरचना पिछले कुछ दशकों में हुयी हैं | मैं उन जीवन मूल्यों पर चलने की कोशिश करती हूँ | फेमिनिज्म उन मूल्यों में से एक मूल्य के करीब है | मेरे लिए बराबरी, और दोयम दर्ज़े का व्यवहार न करना important  है | यह बात स्त्रियों, दलितों, वंचितों, सभी पर लागू होती है | लेकिन क्या मैं स्वयं फेमिनिज्म के सभी आयाम समझती हूँ? नहीं | क्या मैं queer थ्योरी को अपने जीवन में उतार पायी हूँ? नहीं | इसलिए मेरा ये कहना कि मैं फेमिनिस्ट हूँ, या सेक्सुअलिटी एक्टिविस्ट हूँ आदि, कोई मायने नहीं रखता | हाँ जेंडर, सेक्स, सेक्सुअलिटी, इक्वलिटी, एथिक्स, आदि को ले कर मेरी अपनी एक समझ है, जिसे मैं लगातार विकसित करने की कोशिश करती हूँ |

4.       आप क्या क्या लिखती हैं ?

कार्यक्षेत्र में मैं, management , transformation , market research, social sciences, academic research, यहाँ तक कि technology , finance आदि विषयों पर भी ghostwriting के फॉर्मेट में बहुत कुछ लिखती हूँ | मैं अपने नाम से भी लिखती हूँ, और अपने clients  के नाम से भी (ये इस पर निर्भर करता है कि विषय, और पैसे किस प्रकार तय किये गए हैं |) कार्यक्षेत्र के बाहर, मैं १२ वर्ष की आयु से कविता लिखती हूँ (छपवाती नहीं, क्योंकि  अभी ज़रूरत महसूस नहीं होती ), सेक्सुअलिटी तथा रिलेशनशिप्स से सम्बंधित मुद्दों पर लिखती हूँ | मेरे छद्मनाम से मैंने सेक्सुअलिटी के एक बहुत ही विशिष्ट आयाम पर ३ नॉन-फिक्शन पुस्तकें लिखी हैं | मैं जीवन के कई आयामों पर लिखती हूँ, लेकिन मुझे पॉलिटिक्स, स्पोर्ट्स, पॉप कल्चर आदि में कोई दिलचस्पी सामान्यतः नहीं होती |

5.       क्या आप आस्तिक  / धार्मिक हैं ?

इसका सही उत्तर देने के लिए मुझे आपसे धर्म क्या है? आस्था, या विश्वास की साइकोलॉजी क्या है  विषयों के बारे में बात करना पड़ेगी | उतना न तो इस लेख का स्कोप है, न मेरे लिए फ़िलहाल संभव | सार रूप में इतना समझें - मुझे संस्थागत धर्म में कोई दिलचस्पी नहीं | मुझे धर्म के शोषण और महिमा मण्डन वाले स्वरुप में कोई दिलचस्पी नहीं |

लेकिन आस्था और विश्वास का वो रूप जो मनुष्य को ऊपर उठने की उम्मीद देता है, मुझे प्रिय है | कर्म के सिद्धांत का वो हिस्सा जो किसी को विक्टिम होने पर लड़ने की प्रेरणा देता है, मुझे प्रिय है | पुनर्जन, कर्मफल के वे सिद्धांत जो मनुष्य को अच्छाई की राह पर चलाते हैं, वो मुझे उपयोगी लगते हैं | और किसी भी -ism  की तरह, धर्म भी मेरे लिए अपनी उपयोगिता और मानवीयता के आधार पर स्वीकार्य, या अभ्यास करने योग्य है |

मैं अपना आध्यात्मिक, धार्मिक, और एथिकल (मैंने मोरल शब्द काम नहीं लिया) फ्रेमवर्क हिन्दू धर्म के आस पास इसलिए नहीं रखती कि हिन्दू धर्म सबसे बढ़िया, या सबसे सहिष्णु, या सबसे XYZ है, बल्कि इसलिए रखती हूँ, कि मैं एक हिन्दू परिवार में पैदा हुयी | मेरे आसपास के लोग, मेरे प्रिय जान उस राह पर चलते हैं, और logistically  उस फ्रेमवर्क में अपना आध्यात्मिक अभ्यास करना मेरे लिए सुगम है |

मैं लोगों से ये आशा नहीं करती कि वे अपने धर्म, या आध्यात्मिक विकास का अभ्यास मेरे अनुसार करें | उसी तरह मैं इस स्पेस में लोगों का टांग अड़ाना बर्दाश्त भी नहीं करती | अपने और दूसरे किसी भी धर्म के प्रति मुझे तब तक कोई द्वेष नहीं, जब तक आप उसका शोषण या महिमा मण्डन वाला रूप काम में ले कर लोगों को सताने का प्रयास न करें |

6.       आपके परिवार में कौन कौन है ?

इस बात से आपको कोई लेना देना नहीं | मेरे परिवार के बारे में बात मैं सिर्फ तभी करती हूँ जब वो लेखन के सन्दर्भ में ज़रूरी हो, या जब उनको रज़ामंदी या इच्छा हो | आपको मुझसे मित्रता या संपर्क रखना है, उसे मुझ तक सीमित रखें | यदि आप मुझे इस कदर नज़दीक लगेंगे कि आपको मेरे परिवार के बारे में पता हो, तो मैं आपको खुद बता दूँगी |

7.       आपका सेक्सुअल ओरिएंटेशन क्या है ?

वैसे तो ये आपका मुद्दा नहीं, लेकिन क्योंकि मैं सेक्सुअलिटी पर लिखती हूँ, मैं इस प्रश्न की महत्ता समझ सकती हूँ | मैं Demisexual, Heteroflexible हूँ, LGBTQ नज़रिये से ally  हूँ, लाइफस्टाइल दृष्टिकोण से submissive हूँ, ethically Polyamorous हूँ, और mild masochist  हूँ | इससे ज़्यादा जानने की सिर्फ मेरे पार्टनर को ज़रूरत है | 

8.       क्या आप vegetarian हैं ?

जी हाँ | मैं अंडा खाती थी, अब नहीं खाती | मुझे ग्लूटेन से एलर्जी है, इसलिए मैं गेहूं से बना कुछ नहीं खाती | पिछले कुछ दिनों से मेरा शुगर हाई हुआ है, और मैं उसे रिवर्स करने की मशक्कत में हूँ, इसलिए मीठा पसंद होने के बावजूद मैं अब मीठा नहीं खाती | मैं सिगरेट, तम्बाकू, शराब आदि कोई नशा नहीं करती | मैंने अपने जीवन में ये कभी try  नहीं किये ऐसा नहीं कहूँगी, लेकिन ये मेरे होने के तरीके में मुझे अपने लिए स्वस्थ चुनाव नज़र नहीं आये |

9.       आपकी वॉल से क्या उम्मीद करूँ ?

·       सामान्यतः तमीज, इज़्ज़त, सम्मान,

·       मुंहफट बेबाकी और बेलौसी,

·       कभी कभी बतकुच्चन,

·       द्वेष के लिए मुंह पर गाली और त्वरित ब्लॉक गति,

·       उड़ते तीर (लेना न लेना आपकी इच्छा पर निर्भर),

·       संगीत, रंग, रचनात्मकता,

·       यथासंभव ईमानदारी,

·       गहन पड़ताल और खोज तलाश - बाहर भी और भीतर भी

·       लोगों की, और मेरी अपनी स्वतंत्रता और सेफ स्पेस के लिए भीषण आक्रामकता

 

10.   आपके बारे में कुछ और बताइये?

ये तो सिर्फ झांकी है, पिक्चर तो अभी बाकी है:) देखते रही, साथ पढ़ते रहिये, सीखते रहिये, सिखाते रहिये, मुझे कोई जल्दी नहीं है :)

 

©Anupama Garg 2022

Wednesday, 12 January 2022

क्या मास्टरबेशन या हस्तमैथुन बुरी आदत है ?

#sexuality_notes_by_Anupama – 6

 सबसे पहली बात अच्छा या बुरा कुछ नहीं होता | यह ज़रूर होता है कि कुछ चीजों को करने से शरीर पर नुकसान दायक प्रभाव पड़ सकते हैं और कुछ चीजों को करने पर शरीर पर लाभकारी असर पड़ सकता है | ठीक यही बात मन पर, सेक्सुअलिटी पर, संबंधों पर, सामाजिक संरचना पर भी लागू होती है | 

इसे ऐसे ऐसे समझें जैसे भोजन | क्या ज़्यादा खाना बुरी आदत है ? ये इस पर निर्भर करेगा कि आपको कितनी भूख लगती है, आपके शरीर की बनावट कैसी है, और आपको भूख क्यों लगती है ? क्या आपको भूख मानसिक तनाव के कारण लगती है, या आपकी खुराक ही ज़्यादा है ? अगर भूख ज़्यादा लगने से आपके शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ रहे हैं तो चिंता की बात है, वरना भूख लग्न अपने आप में कोई ख़राब या अच्छी बात नहीं है |

दूसरी बात ये, कि ज़रुरत और आदत में फर्क है | ज़रुरत आपके मनुष्य होने का, जीवित होने का हिस्सा है, आदत आपकी परवरिश का हिस्सा है | आदत को छोड़ना मुमकिन है, लेकिन ज़रुरत को मिटाना संभव नहीं | जैसे मुझे मीठा खाना पसंद है, मीठा की जगह बिना शक्कर का खाना खाया जा सकता है, लेकिन खाना नहीं छोड़ा जा सकता यदि जीवित रहना है | 

अब यहाँ कई लोग धर्म, आध्यात्म आदि की दुहाई दे कर कहेंगे, कि सेक्स की इच्छा का दमन किया जा सकता है | हाँ शायद, लेकिन जीवन में सिर्फ ज़िंदा रहना एक बात है, और जीवन की गुणवत्ता एक अलग बात है | इसका मतलब ये नहीं कि सेक्स करना ही होगा | लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं कि सेक्स की इच्छा को दबा देना, या उसे गलत, या अनैतिक ठहरा देने से वो गलत हो जायेगा | सेक्स एक नैसर्गिक ज़रूरत है, और मनुष्यों में, सेक्स सिर्फ प्रजनन नहीं, अपितु सुख के लिए भी है |

अब जब ये देख लिया हमने, तो निःस्सन्देह pleasure  को चुनना या न चुनना व्यक्तिगत है | यदि आप ने pleasure को चुना है, तो स्वाभाविक है कि उस ज़रुरत की तृप्ति कहीं से तो होगी | हस्तमैथुन सबसे सामान्य, व सबसे प्रचलित तरीका है सेक्सुअल संतुष्टि का | इसके पीछे कई कारण हैं |

बचपन में जब शरीर का विकास होता है तो स्पर्श की इच्छा, सामान्य है | यौनांगों की सफाई करते समय यौन स्पर्श और उससे होने वाली उत्तेजना भी सामान्य है | और फिर उसकी बार बार इच्छा होना भी उतना ही सामान्य है, जितना किसी भी और इन्द्रिय से होने वाली उत्तेजना | बचपन में जितने वीडियो गेम खेलते, पिक्चर देखते लड़के मिल जायेंगे, उतने जवानी और अधेड़ावस्था में शायद ही मिलें | प्रश्न ये है कि इस स्पर्श का प्रभाव क्या पड़ेगा |

हर व्यक्ति की अपनी अपनी ज़रूरतें होंगी | कुछ लोगों को बचपन में समझदार लोग मिल जायेंगे और बताएँगे कि इस में कुछ गलत नहीं है, लेकिन किसी भी और चीज़ की तरह इसकी भी अति ख़राब है | लेकिन अधिकतर लोगों को शर्मिंदा किया जायेगा और इससे होने वाले काल्पनिक नुकसान समझाए जायेंगे | कहा जाएगा कि हस्तमैथुन से कमज़ोरी आती है, स्वप्नदोष, शीघपतन, आदि हो जाता है | सच ये है, कि इन सभी बातों के पीछे कई कारण हो सकते हैं | इनके पीछे स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति, प्राइवेसी, पार्टनर के साथ के सम्बन्ध कैसे हैं, ये सभी फैक्टर्स हो सकते हैं |  

हस्तमैथुन को देखने का एक तरीका और है |  वो है स्पर्श इन्द्रिय की अतृप्ति | बचपन में जब हम बहुत छोटे होते हैं, हमारी मालिश की जाती है, हमें  है, दुलराया जाता है, सहलाया जाता है | फिर धीरे धीरे हम बड़े हो जाते हैं, और ये सब आमतौर पर कम हो जाता है | खास  तौर पर पुरुषों के लिए |



अब ऐसे में तकरीबन 3 साल की उम्र से (यही वह आयु है आजकल जब बच्चा स्कूल जाने लगता है )  से ले कर 12 - 13 साल की आयु तक स्पर्श अधिक नहीं मिल रहा | और फिर ऐसे में एक दिन बच्चा अपने यौन अंगों में स्पर्श से उपजी एक बिलकुल ही अलग किस्म का अनुभव करता है | अगर बच्चे को किसी ने बचपन  उत्पीड़ित नहीं किया है, उसके मन में स्पर्श को ले कर अगर कोई भय नहीं है तो सोचिये उसकी स्पर्श की वो अधूरी ज़रुरत उसे कैसे subconsciously realize होगी | 

एक तरह से देखें तो एक सामान्य बच्चे की 5 इन्द्रियाँ और एक की ज़रूरतें यानि 20 प्रतिशत  पूरा हुआ ही नहीं | बच्चा तो बच्चा, स्पर्श की ज़रुरत पूरी हुए बिना अधिकतर लोगों की पूरी उम्र ही निकल जाती है | ऐसे में स्पर्श सिर्फ इंटिमेसी या प्राइवेसी में मिलता है | और उसमें भी सिर्फ जजमेंट मिलता है ! ऐसे में एक नज़रिये से यदि देखा जाये, तो हस्तमैथुन एक स्वस्थ चॉइस है क्योंकि वह comfort touching की तरह काम करता है |

Masturbation या हस्तमैथुन के साथ जानने के लिए एक चीज़ और  भी है | वो है Death Grip और उसका कारण है शारीरिक बनावट में फ़र्क | फिर से विशेष तौर पर पुरुषों के साथ | पुरुषों के हाथ का स्ट्रक्चर, और महिला की योनि का स्ट्रक्चर अलग अलग है | हाथ की गृप, और vaginal walls की इलास्टिसिटी, पकड़, सब अलग अलग है | 

जो लोग बहुत प्रेशर लगा कर मास्टरबेट करते हैं, उनके लिए कई बार साथी के साथ सेक्स करते समय ejaculate करना मुश्किल हो जाता है (मैंने यहाँ स्खलन शब्द क्यों काम लिया ऑर्गैस्म Orgasm क्यों नहीं, ये किसी और पोस्ट में ) | यहाँ एक चीज़ ध्यान रखने की है कि death grip कोई मेडिकल टर्म नहीं है | यह एक कॉमन टर्म है, जिसे लोग इस्तेमाल करते हैं हस्तमैथुन के एक तरीके को बताने के लिए | 


लेकिन इसका असर आपके यौन संबंधों पर बिलकुल पड़ सकता है | अब ये आदत वाला हिस्सा है जिसे अमूमन unlearn किया जा सकता है, भले ही मुश्किल से | असल में देखा जाये तो सेक्स के बारे में बहुत कुछ है जो हमें भूलने और दोबारा, नए तरीके से सीखने की ज़रुरत है  | इन्हीं चीज़ों में से एक ये है कि masturbation या हस्तमैथुन सही या गलत नहीं होता, लेकिन उससे आपके जीवन पर प्रभाव वैसे ही पड़ता है, जैसे किसी भी और चीज़ का |


डिस्क्लेमर - मेरी वॉल पर सेक्स और सेक्सुअलिटी के सम्बन्ध में बात इसलिए की जाती है कि पूर्वाग्रहों, कुंठाओं से बाहर आ कर, इस विषय पर संवाद स्थापित किया जा सके, और एक स्वस्थ समाज का विकास किया जा सके | यहाँ किसी की भावनाएं भड़काने, किसी को चोट पहुँचाने, या किसी को क्या करना चाहिए ये बताने का प्रयास हरगिज़ नहीं किया जाता | ऐसे ही, कृपया ये प्रयास मेरे साथ न करें | प्रश्न पूछना चाहें, तो वॉल पर पूछें, या फिर पहले कमेंट में गूगल फॉर्म है, वहां पूछ सकते हैं | इन पोस्ट्स को इनबॉक्स में आने का न्योता न समझें |

©Anupama Garg 2022

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Thursday, 6 January 2022

लोग अपने सिबलिंग्स के साथ सेक्स के सपने क्यों देखते हैं ?

 #sexuality_notes_by_Anupama – 5

लोग अपने सिबलिंग्स के साथ सेक्स के सपने क्यों देखते हैं। मैं 40 वर्षीय तलाकशुदा महिला हूँ, तलाक के बाद कभी पति तो कभी भाई के साथ सेक्स के सपने दिखते, भाई के साथ जब भी देखती तो सुबह उठकर बेहद शर्मिंदगी सी होती है। जबकि भाई के साथ मेरे रिश्ते बिल्कुल नॉर्मल, मतलब जैसे सामान्य भाई बहन होते हैं, वैसे ही हैं। जो सपने में दिखता वह होशोहवास में जिंदगी में कभी नहीं सोचा, बल्कि सपने के बाद बहुत देर तक अजीब लगता रहता है।

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पिछली एक पोस्ट में कुंठा के बारे में बात की थी हम लोगों ने कि कुंठा क्या है? फ़्रस्ट्रेशन या कुंठा का मतलब है, जब कोई इच्छा पूरी न हो, और इस बात से खीझ, छटपटाहट हो | यहाँ एक चीज़ समझना ज़रूरी है, वो ये कि अपने आप में कुंठा अच्छी या बुरी नहीं होती | आप उसे कैसे मैनेज करते हैं, और कुंठा के कारण आपके जीवन पर असर कैसा पड़ता है, इस से तय होता है कि अच्छा क्या है और बुरा क्या |

आप के अनुसार आप 40 साल की हैं और तलाकशुदा हैं | तो मैं ये मान ले रही हूँ, कि आपकी शादी में आपका अपने पति के साथ सेक्सुअल रिश्ता था | वो कितना संतुष्टि से भरा  था, इस बारे में मैं कोई कयास नहीं लगाऊंगी | अब जब पति से आपका अलगाव हो चुका, तो ऐसा तो नहीं है कि आपके शरीर की सेक्स और पुरुष के बदन के लिए चाह या ज़रुरत ख़त्म हो गयी | हर स्वस्थ व्यक्ति की , चाहे उनका कोई भी जेंडर हो, कुछ सेक्सुअल ज़रूरतें, प्रैफरेंसेज (पसंद नापसंद), डिजायर (इच्छा) होती ही हैं | ऐसे में उनका पूरा न होना, कहीं तो फ़्रस्ट्रेशन पैदा करेगा ही | इस फ़्रस्ट्रेशन को न निकल पाने का नतीजा भी हो सकते हैं आपके सपने |

आपके प्रश्न का दूसरा हिस्सा है कि आपको अपने भाई के साथ सेक्स के सपने दिखते हैं, और इससे आपको अजीब (अगर मैं ठीक समझ पा रही हूँ तो 'गन्दा' ) लगता है | ये स्वाभाविक है | आपके शरीर और मन की सेक्सुअल नीड्स क्योंकि पूरी नहीं हो पा रहीं तो आपके इर्द गिर्द जो पुरुष  हैं,उनकी तरफ आपका मन जा रहा है | क्योंकि सामान्य तौर पर परिवार की अवधारणा वाले किसी भी समाज में, incest या सिब्लिंग्स में सेक्सुअल संबंधों को बुरा समझा जाता है, इसलिए आपका गिल्ट भी स्वाभाविक है | हमारी परिवार को ले कर मोरैलिटी बहुत गहरी है, और ऐसे में, जब कोई इच्छा इस फ्रेमवर्क पर सवाल उठाती है तो उससे discomfort या तकलीफ होना, अजीब लगना, गिल्ट महसूस करना बहुत स्वाभाविक है |

यहाँ ज़रूरी ये है कि इससे आपके रिश्तों में बदलाव तो नहीं आया | जैसा अपने कहा आपके भाई के साथ आपका सम्बन्ध वैसा ही है जैसा बहन भाई में सामान्यतः होता है, इसलिए मुझे इस समय परेशानी जैसा कुछ नज़र नहीं आता | लेकिन मुझे ये ज़रूर लगता है कि आपकी ज़रूरतें पूरी होना ज़रूरी है, और अन्य किसी भी दृष्टिकोण से हों या न हों, आपके स्वयं के मन और भावनाओं के लिए वो ज़रूरी है |

आप यहाँ कुछ चीज़ों के बारे में सोच कर देखें | क्या आपके पति के अतिरिक्त आपके जीवन में कोई पुरुष था जिससे आपके सेक्सुअल सम्बन्ध रहे हों?  यदि हाँ तो क्या कभी उस पुरुष के बारे में भी सपने आते हैं ? क्या तलाक के बाद, अभी आपके जीवन में कोई साथी है? क्या आप मास्टरबेट करती हैं ? क्या आपके घर में आपको प्राइवेसी मिल पाती है, क्योंकि आम तौर पर भारत में घर ,बहुत बड़े हों, और सबके अपने कमरे हों, ऐसा काम हो पता है, और ऐसे में प्राइवेसी एक बड़ी समस्या बन जाती है | क्या आपके लिए ये संभव है कि आप  सेक्स टॉयज के जरिये अपनी ज़रूरतें explore  कर पाएं? क्या आपके लिए किसी के साथ डेट करना संभव है ? क्या आपके लिए सिर्फ कैसुअल सेक्स के लिए किसी के साथ आपसी सहमति से हुक अप करना संभव है ?

यदि इनमें से कुछ भी संभव नहीं, तो मैं आप को ये राय दूँगी, कि किसी मनोवैज्ञानिक से मिलें | Psychotherapists कई बार आपकी काउन्सलिंग करते समय बहुत सारे ऐसे विषयों पर डिटेल में बात कर पते हैं, जो ऊपर से सेक्स सम्बंधित नहीं लगते | लेकिन अक्सर ऐसे विषय, अनुभव, या विचार, सेक्स से सम्बंधित आपकी मानसिकता और आपके नज़रिये को गहरे अवचेतन में बैठ कर, प्रभावित करते हैं | यदि आपको लग रहा है कि आपकी ज़रूरतें पूरा न हो पाना, आपके सामान्य जीवन, और रिश्तों को प्रभावित कर सकता है तो आपको किसी अच्छे मनोवैज्ञानिक से बात कर उनकी राय ज़रूर लेनी चाहिए |

आशा करती हूँ आपको मेरे जवाब से कुछ मदद मिले |

डिस्क्लेमर - मेरी वॉल पर सेक्स और सेक्सुअलिटी के सम्बन्ध में बात इसलिए की जाती है कि पूर्वाग्रहों, कुंठाओं से बाहर आ कर, इस विषय पर संवाद स्थापित किया जा सके, और एक स्वस्थ समाज का विकास किया जा सके | यहाँ किसी की भावनाएं भड़काने, किसी को चोट पहुँचाने, या किसी को क्या करना चाहिए ये बताने का प्रयास हरगिज़ नहीं किया जाता | ऐसे ही, कृपया ये प्रयास मेरे साथ न करें | प्रश्न पूछना चाहें, तो वॉल पर पूछें, या फिर पहले कमेंट में गूगल फॉर्म है, वहां पूछ सकते हैं | इन पोस्ट्स को इनबॉक्स में आने का न्योता न समझें |

©Anupama Garg 2022

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