Tuesday, 18 January 2022

कौन हैं आप? Who is Anupama?

 

आज की पोस्ट बिलकुल अलग है | इस बारे में कुछ दोस्तों ने पहले कभी कभी पूछा है, और मैंने कभी जवाब दिया, कभी टाल दिया है लेकिन बीते  दिनों में इसे लिखने की बहुत ज़रूरत महसूस हुयी है | अभी विशेष तौर पर जब  लोग मुझसे जुड़े हैं तो मुझे लगता है, सभी का थोड़ा सा expectation management  ज़रूरी है | इस तरह आपको मेरे और इस वॉल के बारे में कोई ग़लतफ़हमी नहीं रहेगी और हमारे बीच तल्खियों के मौके थोड़े कम आएंगे | तो शुरू  करते हैं :

1.       कौन हैं आप?

मैं एक स्त्री हूँ, मैं भारतीय हूँ, भारत में ही रहती हूँ, दिल्ली और अजमेर के बीच | मेरा पेशा है strategy,  research,  management,  और लेखन | ये काम मैं बहुत से विषयों, और बहुत से clients  के लिए करती हूँ | इसके अलावा मैं शौकिया गायन करती हूँ (मैंने संगीत की १३ वर्ष नियमित शिक्षा पायी है, और मैं पिछले बहुत वर्षों से अनियमित किन्तु अभ्यास करने  की कोशिश करती हूँ )  |

2.       क्या आप शादीशुदा हैं ? आपने शादी क्यों नहीं की ?

पहले मौका नहीं मिला, और बाद में ज़रुरत महसूस नहीं हुयी | वैसे तो इस प्रश्न से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए, लेकिन मैं जानती हूँ कि अधिकतर लोगों की इसमें बहुत दिलचस्पी है | जी नहीं, मैं अविवाहित हूँ, तथा मेरा इस समय कोई साथी नहीं है | मैं, विवाह को ज़रूरी नहीं समझती, लेकिन मैं ये भी नहीं समझती कि  रहना चाहिए  | लोग हैं, जिनके लिए उनकी परिस्थितियों के हिसाब से विवाह एक अच्छा चुनाव हो सकता है | उनके लिए मेरी शुभेच्छाएं सदैव हैं | व्यक्तिगत मेरे लिए, विवाह तभी संभव और ज़रूरी होगा, जब मुझे मेरा मनचाहा, समझदार, सुलझा, अविवाहित पुरुष मिले, तथा, हम दोनों को वैधानिक, सामाजिक, या पारिवारिक दृष्टिकोण से विवाह करना आवश्यक लगे | सिर्फ शादी के लिए शादी, मेरे जीवन के ढांचे में फिट नहीं होती |

3.       क्या आप फेमिनिस्ट हैं ?

पता नहीं | मुझे किसी भी प्रकार के -ism , -ist  आदि से कोई विशेष फ़र्क नहीं पड़ता | न ही किसी स्कूल, किसी ढांचे में फिट होने की ख्वाहिश होती है | कुछ abstract  concepts  हैं, जिन पर मेरे जीवन मूल्यों की संरचना पिछले कुछ दशकों में हुयी हैं | मैं उन जीवन मूल्यों पर चलने की कोशिश करती हूँ | फेमिनिज्म उन मूल्यों में से एक मूल्य के करीब है | मेरे लिए बराबरी, और दोयम दर्ज़े का व्यवहार न करना important  है | यह बात स्त्रियों, दलितों, वंचितों, सभी पर लागू होती है | लेकिन क्या मैं स्वयं फेमिनिज्म के सभी आयाम समझती हूँ? नहीं | क्या मैं queer थ्योरी को अपने जीवन में उतार पायी हूँ? नहीं | इसलिए मेरा ये कहना कि मैं फेमिनिस्ट हूँ, या सेक्सुअलिटी एक्टिविस्ट हूँ आदि, कोई मायने नहीं रखता | हाँ जेंडर, सेक्स, सेक्सुअलिटी, इक्वलिटी, एथिक्स, आदि को ले कर मेरी अपनी एक समझ है, जिसे मैं लगातार विकसित करने की कोशिश करती हूँ |

4.       आप क्या क्या लिखती हैं ?

कार्यक्षेत्र में मैं, management , transformation , market research, social sciences, academic research, यहाँ तक कि technology , finance आदि विषयों पर भी ghostwriting के फॉर्मेट में बहुत कुछ लिखती हूँ | मैं अपने नाम से भी लिखती हूँ, और अपने clients  के नाम से भी (ये इस पर निर्भर करता है कि विषय, और पैसे किस प्रकार तय किये गए हैं |) कार्यक्षेत्र के बाहर, मैं १२ वर्ष की आयु से कविता लिखती हूँ (छपवाती नहीं, क्योंकि  अभी ज़रूरत महसूस नहीं होती ), सेक्सुअलिटी तथा रिलेशनशिप्स से सम्बंधित मुद्दों पर लिखती हूँ | मेरे छद्मनाम से मैंने सेक्सुअलिटी के एक बहुत ही विशिष्ट आयाम पर ३ नॉन-फिक्शन पुस्तकें लिखी हैं | मैं जीवन के कई आयामों पर लिखती हूँ, लेकिन मुझे पॉलिटिक्स, स्पोर्ट्स, पॉप कल्चर आदि में कोई दिलचस्पी सामान्यतः नहीं होती |

5.       क्या आप आस्तिक  / धार्मिक हैं ?

इसका सही उत्तर देने के लिए मुझे आपसे धर्म क्या है? आस्था, या विश्वास की साइकोलॉजी क्या है  विषयों के बारे में बात करना पड़ेगी | उतना न तो इस लेख का स्कोप है, न मेरे लिए फ़िलहाल संभव | सार रूप में इतना समझें - मुझे संस्थागत धर्म में कोई दिलचस्पी नहीं | मुझे धर्म के शोषण और महिमा मण्डन वाले स्वरुप में कोई दिलचस्पी नहीं |

लेकिन आस्था और विश्वास का वो रूप जो मनुष्य को ऊपर उठने की उम्मीद देता है, मुझे प्रिय है | कर्म के सिद्धांत का वो हिस्सा जो किसी को विक्टिम होने पर लड़ने की प्रेरणा देता है, मुझे प्रिय है | पुनर्जन, कर्मफल के वे सिद्धांत जो मनुष्य को अच्छाई की राह पर चलाते हैं, वो मुझे उपयोगी लगते हैं | और किसी भी -ism  की तरह, धर्म भी मेरे लिए अपनी उपयोगिता और मानवीयता के आधार पर स्वीकार्य, या अभ्यास करने योग्य है |

मैं अपना आध्यात्मिक, धार्मिक, और एथिकल (मैंने मोरल शब्द काम नहीं लिया) फ्रेमवर्क हिन्दू धर्म के आस पास इसलिए नहीं रखती कि हिन्दू धर्म सबसे बढ़िया, या सबसे सहिष्णु, या सबसे XYZ है, बल्कि इसलिए रखती हूँ, कि मैं एक हिन्दू परिवार में पैदा हुयी | मेरे आसपास के लोग, मेरे प्रिय जान उस राह पर चलते हैं, और logistically  उस फ्रेमवर्क में अपना आध्यात्मिक अभ्यास करना मेरे लिए सुगम है |

मैं लोगों से ये आशा नहीं करती कि वे अपने धर्म, या आध्यात्मिक विकास का अभ्यास मेरे अनुसार करें | उसी तरह मैं इस स्पेस में लोगों का टांग अड़ाना बर्दाश्त भी नहीं करती | अपने और दूसरे किसी भी धर्म के प्रति मुझे तब तक कोई द्वेष नहीं, जब तक आप उसका शोषण या महिमा मण्डन वाला रूप काम में ले कर लोगों को सताने का प्रयास न करें |

6.       आपके परिवार में कौन कौन है ?

इस बात से आपको कोई लेना देना नहीं | मेरे परिवार के बारे में बात मैं सिर्फ तभी करती हूँ जब वो लेखन के सन्दर्भ में ज़रूरी हो, या जब उनको रज़ामंदी या इच्छा हो | आपको मुझसे मित्रता या संपर्क रखना है, उसे मुझ तक सीमित रखें | यदि आप मुझे इस कदर नज़दीक लगेंगे कि आपको मेरे परिवार के बारे में पता हो, तो मैं आपको खुद बता दूँगी |

7.       आपका सेक्सुअल ओरिएंटेशन क्या है ?

वैसे तो ये आपका मुद्दा नहीं, लेकिन क्योंकि मैं सेक्सुअलिटी पर लिखती हूँ, मैं इस प्रश्न की महत्ता समझ सकती हूँ | मैं Demisexual, Heteroflexible हूँ, LGBTQ नज़रिये से ally  हूँ, लाइफस्टाइल दृष्टिकोण से submissive हूँ, ethically Polyamorous हूँ, और mild masochist  हूँ | इससे ज़्यादा जानने की सिर्फ मेरे पार्टनर को ज़रूरत है | 

8.       क्या आप vegetarian हैं ?

जी हाँ | मैं अंडा खाती थी, अब नहीं खाती | मुझे ग्लूटेन से एलर्जी है, इसलिए मैं गेहूं से बना कुछ नहीं खाती | पिछले कुछ दिनों से मेरा शुगर हाई हुआ है, और मैं उसे रिवर्स करने की मशक्कत में हूँ, इसलिए मीठा पसंद होने के बावजूद मैं अब मीठा नहीं खाती | मैं सिगरेट, तम्बाकू, शराब आदि कोई नशा नहीं करती | मैंने अपने जीवन में ये कभी try  नहीं किये ऐसा नहीं कहूँगी, लेकिन ये मेरे होने के तरीके में मुझे अपने लिए स्वस्थ चुनाव नज़र नहीं आये |

9.       आपकी वॉल से क्या उम्मीद करूँ ?

·       सामान्यतः तमीज, इज़्ज़त, सम्मान,

·       मुंहफट बेबाकी और बेलौसी,

·       कभी कभी बतकुच्चन,

·       द्वेष के लिए मुंह पर गाली और त्वरित ब्लॉक गति,

·       उड़ते तीर (लेना न लेना आपकी इच्छा पर निर्भर),

·       संगीत, रंग, रचनात्मकता,

·       यथासंभव ईमानदारी,

·       गहन पड़ताल और खोज तलाश - बाहर भी और भीतर भी

·       लोगों की, और मेरी अपनी स्वतंत्रता और सेफ स्पेस के लिए भीषण आक्रामकता

 

10.   आपके बारे में कुछ और बताइये?

ये तो सिर्फ झांकी है, पिक्चर तो अभी बाकी है:) देखते रही, साथ पढ़ते रहिये, सीखते रहिये, सिखाते रहिये, मुझे कोई जल्दी नहीं है :)

 

©Anupama Garg 2022

Wednesday, 12 January 2022

क्या मास्टरबेशन या हस्तमैथुन बुरी आदत है ?

#sexuality_notes_by_Anupama – 6

 सबसे पहली बात अच्छा या बुरा कुछ नहीं होता | यह ज़रूर होता है कि कुछ चीजों को करने से शरीर पर नुकसान दायक प्रभाव पड़ सकते हैं और कुछ चीजों को करने पर शरीर पर लाभकारी असर पड़ सकता है | ठीक यही बात मन पर, सेक्सुअलिटी पर, संबंधों पर, सामाजिक संरचना पर भी लागू होती है | 

इसे ऐसे ऐसे समझें जैसे भोजन | क्या ज़्यादा खाना बुरी आदत है ? ये इस पर निर्भर करेगा कि आपको कितनी भूख लगती है, आपके शरीर की बनावट कैसी है, और आपको भूख क्यों लगती है ? क्या आपको भूख मानसिक तनाव के कारण लगती है, या आपकी खुराक ही ज़्यादा है ? अगर भूख ज़्यादा लगने से आपके शरीर पर दुष्प्रभाव पड़ रहे हैं तो चिंता की बात है, वरना भूख लग्न अपने आप में कोई ख़राब या अच्छी बात नहीं है |

दूसरी बात ये, कि ज़रुरत और आदत में फर्क है | ज़रुरत आपके मनुष्य होने का, जीवित होने का हिस्सा है, आदत आपकी परवरिश का हिस्सा है | आदत को छोड़ना मुमकिन है, लेकिन ज़रुरत को मिटाना संभव नहीं | जैसे मुझे मीठा खाना पसंद है, मीठा की जगह बिना शक्कर का खाना खाया जा सकता है, लेकिन खाना नहीं छोड़ा जा सकता यदि जीवित रहना है | 

अब यहाँ कई लोग धर्म, आध्यात्म आदि की दुहाई दे कर कहेंगे, कि सेक्स की इच्छा का दमन किया जा सकता है | हाँ शायद, लेकिन जीवन में सिर्फ ज़िंदा रहना एक बात है, और जीवन की गुणवत्ता एक अलग बात है | इसका मतलब ये नहीं कि सेक्स करना ही होगा | लेकिन इसका मतलब ये भी नहीं कि सेक्स की इच्छा को दबा देना, या उसे गलत, या अनैतिक ठहरा देने से वो गलत हो जायेगा | सेक्स एक नैसर्गिक ज़रूरत है, और मनुष्यों में, सेक्स सिर्फ प्रजनन नहीं, अपितु सुख के लिए भी है |

अब जब ये देख लिया हमने, तो निःस्सन्देह pleasure  को चुनना या न चुनना व्यक्तिगत है | यदि आप ने pleasure को चुना है, तो स्वाभाविक है कि उस ज़रुरत की तृप्ति कहीं से तो होगी | हस्तमैथुन सबसे सामान्य, व सबसे प्रचलित तरीका है सेक्सुअल संतुष्टि का | इसके पीछे कई कारण हैं |

बचपन में जब शरीर का विकास होता है तो स्पर्श की इच्छा, सामान्य है | यौनांगों की सफाई करते समय यौन स्पर्श और उससे होने वाली उत्तेजना भी सामान्य है | और फिर उसकी बार बार इच्छा होना भी उतना ही सामान्य है, जितना किसी भी और इन्द्रिय से होने वाली उत्तेजना | बचपन में जितने वीडियो गेम खेलते, पिक्चर देखते लड़के मिल जायेंगे, उतने जवानी और अधेड़ावस्था में शायद ही मिलें | प्रश्न ये है कि इस स्पर्श का प्रभाव क्या पड़ेगा |

हर व्यक्ति की अपनी अपनी ज़रूरतें होंगी | कुछ लोगों को बचपन में समझदार लोग मिल जायेंगे और बताएँगे कि इस में कुछ गलत नहीं है, लेकिन किसी भी और चीज़ की तरह इसकी भी अति ख़राब है | लेकिन अधिकतर लोगों को शर्मिंदा किया जायेगा और इससे होने वाले काल्पनिक नुकसान समझाए जायेंगे | कहा जाएगा कि हस्तमैथुन से कमज़ोरी आती है, स्वप्नदोष, शीघपतन, आदि हो जाता है | सच ये है, कि इन सभी बातों के पीछे कई कारण हो सकते हैं | इनके पीछे स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति, प्राइवेसी, पार्टनर के साथ के सम्बन्ध कैसे हैं, ये सभी फैक्टर्स हो सकते हैं |  

हस्तमैथुन को देखने का एक तरीका और है |  वो है स्पर्श इन्द्रिय की अतृप्ति | बचपन में जब हम बहुत छोटे होते हैं, हमारी मालिश की जाती है, हमें  है, दुलराया जाता है, सहलाया जाता है | फिर धीरे धीरे हम बड़े हो जाते हैं, और ये सब आमतौर पर कम हो जाता है | खास  तौर पर पुरुषों के लिए |



अब ऐसे में तकरीबन 3 साल की उम्र से (यही वह आयु है आजकल जब बच्चा स्कूल जाने लगता है )  से ले कर 12 - 13 साल की आयु तक स्पर्श अधिक नहीं मिल रहा | और फिर ऐसे में एक दिन बच्चा अपने यौन अंगों में स्पर्श से उपजी एक बिलकुल ही अलग किस्म का अनुभव करता है | अगर बच्चे को किसी ने बचपन  उत्पीड़ित नहीं किया है, उसके मन में स्पर्श को ले कर अगर कोई भय नहीं है तो सोचिये उसकी स्पर्श की वो अधूरी ज़रुरत उसे कैसे subconsciously realize होगी | 

एक तरह से देखें तो एक सामान्य बच्चे की 5 इन्द्रियाँ और एक की ज़रूरतें यानि 20 प्रतिशत  पूरा हुआ ही नहीं | बच्चा तो बच्चा, स्पर्श की ज़रुरत पूरी हुए बिना अधिकतर लोगों की पूरी उम्र ही निकल जाती है | ऐसे में स्पर्श सिर्फ इंटिमेसी या प्राइवेसी में मिलता है | और उसमें भी सिर्फ जजमेंट मिलता है ! ऐसे में एक नज़रिये से यदि देखा जाये, तो हस्तमैथुन एक स्वस्थ चॉइस है क्योंकि वह comfort touching की तरह काम करता है |

Masturbation या हस्तमैथुन के साथ जानने के लिए एक चीज़ और  भी है | वो है Death Grip और उसका कारण है शारीरिक बनावट में फ़र्क | फिर से विशेष तौर पर पुरुषों के साथ | पुरुषों के हाथ का स्ट्रक्चर, और महिला की योनि का स्ट्रक्चर अलग अलग है | हाथ की गृप, और vaginal walls की इलास्टिसिटी, पकड़, सब अलग अलग है | 

जो लोग बहुत प्रेशर लगा कर मास्टरबेट करते हैं, उनके लिए कई बार साथी के साथ सेक्स करते समय ejaculate करना मुश्किल हो जाता है (मैंने यहाँ स्खलन शब्द क्यों काम लिया ऑर्गैस्म Orgasm क्यों नहीं, ये किसी और पोस्ट में ) | यहाँ एक चीज़ ध्यान रखने की है कि death grip कोई मेडिकल टर्म नहीं है | यह एक कॉमन टर्म है, जिसे लोग इस्तेमाल करते हैं हस्तमैथुन के एक तरीके को बताने के लिए | 


लेकिन इसका असर आपके यौन संबंधों पर बिलकुल पड़ सकता है | अब ये आदत वाला हिस्सा है जिसे अमूमन unlearn किया जा सकता है, भले ही मुश्किल से | असल में देखा जाये तो सेक्स के बारे में बहुत कुछ है जो हमें भूलने और दोबारा, नए तरीके से सीखने की ज़रुरत है  | इन्हीं चीज़ों में से एक ये है कि masturbation या हस्तमैथुन सही या गलत नहीं होता, लेकिन उससे आपके जीवन पर प्रभाव वैसे ही पड़ता है, जैसे किसी भी और चीज़ का |


डिस्क्लेमर - मेरी वॉल पर सेक्स और सेक्सुअलिटी के सम्बन्ध में बात इसलिए की जाती है कि पूर्वाग्रहों, कुंठाओं से बाहर आ कर, इस विषय पर संवाद स्थापित किया जा सके, और एक स्वस्थ समाज का विकास किया जा सके | यहाँ किसी की भावनाएं भड़काने, किसी को चोट पहुँचाने, या किसी को क्या करना चाहिए ये बताने का प्रयास हरगिज़ नहीं किया जाता | ऐसे ही, कृपया ये प्रयास मेरे साथ न करें | प्रश्न पूछना चाहें, तो वॉल पर पूछें, या फिर पहले कमेंट में गूगल फॉर्म है, वहां पूछ सकते हैं | इन पोस्ट्स को इनबॉक्स में आने का न्योता न समझें |

©Anupama Garg 2022

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Thursday, 6 January 2022

लोग अपने सिबलिंग्स के साथ सेक्स के सपने क्यों देखते हैं ?

 #sexuality_notes_by_Anupama – 5

लोग अपने सिबलिंग्स के साथ सेक्स के सपने क्यों देखते हैं। मैं 40 वर्षीय तलाकशुदा महिला हूँ, तलाक के बाद कभी पति तो कभी भाई के साथ सेक्स के सपने दिखते, भाई के साथ जब भी देखती तो सुबह उठकर बेहद शर्मिंदगी सी होती है। जबकि भाई के साथ मेरे रिश्ते बिल्कुल नॉर्मल, मतलब जैसे सामान्य भाई बहन होते हैं, वैसे ही हैं। जो सपने में दिखता वह होशोहवास में जिंदगी में कभी नहीं सोचा, बल्कि सपने के बाद बहुत देर तक अजीब लगता रहता है।

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पिछली एक पोस्ट में कुंठा के बारे में बात की थी हम लोगों ने कि कुंठा क्या है? फ़्रस्ट्रेशन या कुंठा का मतलब है, जब कोई इच्छा पूरी न हो, और इस बात से खीझ, छटपटाहट हो | यहाँ एक चीज़ समझना ज़रूरी है, वो ये कि अपने आप में कुंठा अच्छी या बुरी नहीं होती | आप उसे कैसे मैनेज करते हैं, और कुंठा के कारण आपके जीवन पर असर कैसा पड़ता है, इस से तय होता है कि अच्छा क्या है और बुरा क्या |

आप के अनुसार आप 40 साल की हैं और तलाकशुदा हैं | तो मैं ये मान ले रही हूँ, कि आपकी शादी में आपका अपने पति के साथ सेक्सुअल रिश्ता था | वो कितना संतुष्टि से भरा  था, इस बारे में मैं कोई कयास नहीं लगाऊंगी | अब जब पति से आपका अलगाव हो चुका, तो ऐसा तो नहीं है कि आपके शरीर की सेक्स और पुरुष के बदन के लिए चाह या ज़रुरत ख़त्म हो गयी | हर स्वस्थ व्यक्ति की , चाहे उनका कोई भी जेंडर हो, कुछ सेक्सुअल ज़रूरतें, प्रैफरेंसेज (पसंद नापसंद), डिजायर (इच्छा) होती ही हैं | ऐसे में उनका पूरा न होना, कहीं तो फ़्रस्ट्रेशन पैदा करेगा ही | इस फ़्रस्ट्रेशन को न निकल पाने का नतीजा भी हो सकते हैं आपके सपने |

आपके प्रश्न का दूसरा हिस्सा है कि आपको अपने भाई के साथ सेक्स के सपने दिखते हैं, और इससे आपको अजीब (अगर मैं ठीक समझ पा रही हूँ तो 'गन्दा' ) लगता है | ये स्वाभाविक है | आपके शरीर और मन की सेक्सुअल नीड्स क्योंकि पूरी नहीं हो पा रहीं तो आपके इर्द गिर्द जो पुरुष  हैं,उनकी तरफ आपका मन जा रहा है | क्योंकि सामान्य तौर पर परिवार की अवधारणा वाले किसी भी समाज में, incest या सिब्लिंग्स में सेक्सुअल संबंधों को बुरा समझा जाता है, इसलिए आपका गिल्ट भी स्वाभाविक है | हमारी परिवार को ले कर मोरैलिटी बहुत गहरी है, और ऐसे में, जब कोई इच्छा इस फ्रेमवर्क पर सवाल उठाती है तो उससे discomfort या तकलीफ होना, अजीब लगना, गिल्ट महसूस करना बहुत स्वाभाविक है |

यहाँ ज़रूरी ये है कि इससे आपके रिश्तों में बदलाव तो नहीं आया | जैसा अपने कहा आपके भाई के साथ आपका सम्बन्ध वैसा ही है जैसा बहन भाई में सामान्यतः होता है, इसलिए मुझे इस समय परेशानी जैसा कुछ नज़र नहीं आता | लेकिन मुझे ये ज़रूर लगता है कि आपकी ज़रूरतें पूरी होना ज़रूरी है, और अन्य किसी भी दृष्टिकोण से हों या न हों, आपके स्वयं के मन और भावनाओं के लिए वो ज़रूरी है |

आप यहाँ कुछ चीज़ों के बारे में सोच कर देखें | क्या आपके पति के अतिरिक्त आपके जीवन में कोई पुरुष था जिससे आपके सेक्सुअल सम्बन्ध रहे हों?  यदि हाँ तो क्या कभी उस पुरुष के बारे में भी सपने आते हैं ? क्या तलाक के बाद, अभी आपके जीवन में कोई साथी है? क्या आप मास्टरबेट करती हैं ? क्या आपके घर में आपको प्राइवेसी मिल पाती है, क्योंकि आम तौर पर भारत में घर ,बहुत बड़े हों, और सबके अपने कमरे हों, ऐसा काम हो पता है, और ऐसे में प्राइवेसी एक बड़ी समस्या बन जाती है | क्या आपके लिए ये संभव है कि आप  सेक्स टॉयज के जरिये अपनी ज़रूरतें explore  कर पाएं? क्या आपके लिए किसी के साथ डेट करना संभव है ? क्या आपके लिए सिर्फ कैसुअल सेक्स के लिए किसी के साथ आपसी सहमति से हुक अप करना संभव है ?

यदि इनमें से कुछ भी संभव नहीं, तो मैं आप को ये राय दूँगी, कि किसी मनोवैज्ञानिक से मिलें | Psychotherapists कई बार आपकी काउन्सलिंग करते समय बहुत सारे ऐसे विषयों पर डिटेल में बात कर पते हैं, जो ऊपर से सेक्स सम्बंधित नहीं लगते | लेकिन अक्सर ऐसे विषय, अनुभव, या विचार, सेक्स से सम्बंधित आपकी मानसिकता और आपके नज़रिये को गहरे अवचेतन में बैठ कर, प्रभावित करते हैं | यदि आपको लग रहा है कि आपकी ज़रूरतें पूरा न हो पाना, आपके सामान्य जीवन, और रिश्तों को प्रभावित कर सकता है तो आपको किसी अच्छे मनोवैज्ञानिक से बात कर उनकी राय ज़रूर लेनी चाहिए |

आशा करती हूँ आपको मेरे जवाब से कुछ मदद मिले |

डिस्क्लेमर - मेरी वॉल पर सेक्स और सेक्सुअलिटी के सम्बन्ध में बात इसलिए की जाती है कि पूर्वाग्रहों, कुंठाओं से बाहर आ कर, इस विषय पर संवाद स्थापित किया जा सके, और एक स्वस्थ समाज का विकास किया जा सके | यहाँ किसी की भावनाएं भड़काने, किसी को चोट पहुँचाने, या किसी को क्या करना चाहिए ये बताने का प्रयास हरगिज़ नहीं किया जाता | ऐसे ही, कृपया ये प्रयास मेरे साथ न करें | प्रश्न पूछना चाहें, तो वॉल पर पूछें, या फिर पहले कमेंट में गूगल फॉर्म है, वहां पूछ सकते हैं | इन पोस्ट्स को इनबॉक्स में आने का न्योता न समझें |

©Anupama Garg 2022

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Monday, 3 January 2022

यौन कुंठित लोगों की कैसे पहचान कर सकते हैं ?

 #sexuality_notes_by_Anupama – 4 यौन कुंठित लोगों की कैसे पहचान कर सकते हैं ?

एक लाइन में उत्तर देना हो तो कहूँगी, लगभग हम सभी किसी न किसी हद तक यौन कुंठित हैं | देख लीजिये सभी को, कुछ हद तक खुद को भी शीशे में | पहली बात ये कि किसी के माथे पर नहीं लिखा होता कि वे यौन कुंठित हैं |

दूसरी बात कुंठा क्या है? फ़्रस्ट्रेशन या कुंठा का मतलब है, जब कोई इच्छा पूरी न हो, और इस बात से खीझ हो | तो दुनिया में कौन है जिसको सेक्सुअल फ़्रस्ट्रेशन कभी न कभी नहीं होती ? हाँ यहाँ ये देखना ज़रूरी है कि सिर्फ फ़्रस्ट्रेशन है, या कोई उस फ़्रस्ट्रेशन के कारण किसी का यौन उत्पीड़न कर रहा है ? कहीं ये सेक्सुअल फ़्रस्ट्रेशन अस्वस्थ रूप तो धारण नहीं कर रही ?

अस्वस्थ रूप की भी कई परिभाषाएं हो सकती हैं | खुद को नुकसान पहुँचाना, किसी से ज़बरदस्ती करना, किसी और को नुकसान पहुँचाना, सेक्सुअल फ़्रस्ट्रेशन का रोज़मर्रा के जीवन पर सामान्य से ज़्यादा प्रभाव पड़ना, जिस जेंडर के प्रति आप आकर्षित होते हैं उसी जेंडर के प्रति घृणा महसूस करने लग्न, ये सब अस्वस्थ कुंठा की परिभाषाएं हो सकती हैं | अब ये कुंठा किसी की शक्ल पर तो लिखी नहीं होती | तो यौन कुंठित लोगों को पहचानेंगे कैसे?

लेकिन यदि मैं सही समझ पा रही हूँ, और आपका सवाल ये है कि अपने बच्चों, या उम्रदराज़ लोगों को यौन उत्पीड़न से सुरक्षित कैसे रखें, तो वो एक अलग प्रश्न है | उस पर एक अलग पोस्ट में चर्चा करेंगे | पर कुंठा के सन्दर्भ में एक चीज़ ज़रूर है जिस पर बात की जानी चाहिए | वो है कि हम ऐसा क्या कर सकते हैं, कि सेक्सुअल फ़्रस्ट्रेशन हमारे आस पास कम पनपे, या अगर पनपे भी, तो उससे डील कैसे करें?

तो सबसे पहली ज़रूरी चीज़ है, स्वस्थ संवाद | अगर हम अपने आस पास खुल कर ये स्वीकार कर पाते हैं कि सेक्सुअल डिजायर नार्मल है, SEX  भी नार्मल है, तो आधी समस्या ख़त्म हो जाती है | आप अक्सर लोगों को कहते सुनेंगे, अरे सेक्स के बारे में बात करने का क्या है? सब को तो पता है, यहाँ तक कि कुछ लोग ये भी कि बच्चियों को तो गुड टच बैड टच पहले से पता होता है | उनसे कोई पूछे बच्चे माँ के पेट से सेक्स के बारे में तो सीख कर नहीं आते |

ये भी कहा जाता है, सेक्स के बारे में बात करना 'व्यभिचार' को बढ़ावा देना है | तो मेरा प्रश्न ये है, अब तक बात नहीं होती थी, और कुंठाओं के पनपने का अंत नहीं है | रोज़ अख़बार में सो-कॉल्ड-एडल्ट्स के व्यभिचार, बच्चों के साथ रेप और पता नहीं किस किस यौन कुंठा का क्या क्या नतीजा पढ़ने को मिलता है | न बात कर के कौनसे झंडे गाड़ लिए हमने मर्यादा के ?

इससे बेहतर है कम से कम सलीके से बात ही कर लें हम सब एक सभ्य समाज की तरह इस विषय पर | ये बिलकुल सच है, कि हर किसी के बस की नहीं है इस विषय पर गंभीर, स्वस्थ, और शालीन चर्चा करना | लेकिन जो कर रहे हैं, उन्हें ही पढ़ लें, बजाय ट्रोल करने के तो कुछ समझ विकसित होगी, और कुंठाओं से थोड़ी मुक्ति मिल पायेगी शायद |

तो पहली बात तो हुयी संवाद | जब सेक्स को नार्मल समझा जाने लगेगा तो अपने आप वो दूर की कौड़ी लगना बंद हो जायेगा | उसे हासिल करना कोई किला फतह करने जैसा नहीं लगेगा | 'यार मैंने उसकी ले ली ' तरह की भाषा अपने आप ही अप्रासंगिक हो जाएगी | लेकिन दूसरी चीज़ है कि यदि फ़्रस्ट्रेशन है ही, तो उसे सुलझाया कैसे जाये?

समझें कि सेक्सुअल फ़्रस्ट्रेशन या यौन कुंठा कोई मेडिकल कंडीशन नहीं है | ये सेक्सुअल arousal, यौन उत्तेजना जैसी लग सकती है, लेकिन है नहीं | यौन उत्तेजना का अर्थ है सेक्स करने की छह, और उसके शारीरिक और मानसिक तौर पर दिखने वाले चिन्ह, लेकिन अगर बहुत बार सेक्सुअल उत्तेजना के बाद सेक्स की चाह की पूर्त्ति न हो, तो  ये फ़्रस्ट्रेशन या कुंठा में बदल सकती है |

ऐसे में सेक्सुअल डिजायर की संतुष्टि करना या न करना ये हर व्यक्ति की अपनी अलग चॉइस हो सकती है | किसको कितनी फ़्रस्ट्रेशन होगी ये भी व्यक्तिगत मसला है | फ़्रस्ट्रेशन इसलिए है कि सेक्स कर नहीं पा रहे, या इसलिए कि सेक्स की क्वालिटी से संतुष्ट नहीं हैं, ये भी व्यक्ति से व्यक्ति पर निर्भर करता है |

कुछ लोगों को मास्टरबेशन या हस्तमैथुन इसका सुगम उपाय लगता है, कुछ लोगों को कैज़ुअल सेक्स, हुक अप, या संभवतः पेड सेक्स, या वैश्यालय जाना भी इसका उपाय नज़र आ सकता है |  कुछ लोग इसके उपाय में औरतों या पुरुषों को बेवकूफ बना कर, फुसला कर, उनके साथ सोने का प्रयत्न करते हैं |

कुछ लोग पोर्न देख कर अपनी फ़्रस्ट्रेशन मिटाते हैं | कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो इस फ़्रस्ट्रेशन का कुछ नहीं करते, उसे भी जीवन के एक नार्मल हिस्से की तरह स्वीकार कर के उसके साथ अपने आप को थाम कर रखते हैं | ऐसे लोग भी हैं, जो hobbies, स्पोर्ट्स, और दूसरे constructive तरीकों का इस्तेमाल करते हैं अपनी फ़्रस्ट्रेशन से डील करने में | अब इनमें से किस तरीके से फ़्रस्ट्रेशन वाकई मिट जाती है, और किस्से नहीं, ये एक अलग ही समझ विकसित करने का मुद्दा है |

मैं यहाँ न तो किसी भी तरीके का समर्थन कर रही हूँ, न ही उसकी आलोचना | इसलिए ये व्यभिचार, और वैश्यालय, और सेक्सुअल एब्यूज टाइप की बकवास ले कर न आएं | मैंने सिर्फ कुछ तरीकों के बारे में यहाँ बात की है |

इसी तरह इनमें से कौनसे तरीके ठीक हैं, कौनसे नहीं इस को समझने के कई नज़रिये हैं - एक एथिकल (मैंने जान बूझ कर मॉरल शब्द काम नहीं लिया है यहाँ ) या नैतिक, वैधानिक या लीगल, साइकोलॉजिकल या मानसिक, सोशल या सामाजिक, इमोशनल या भावनात्मक आदि |

 इन सब चीज़ों को देखते समय एक चीज़ और ध्यान रखने की है, वो है सेक्स, सेक्सुअलिटी, सेक्सुअल हेल्थ सम्बंधित चीज़ों का बाज़ारीकरण | ये सिर्फ पोर्न, सुली डील्स, सेक्स वर्क आदि के रूप में ही नहीं, बल्कि सेक्स टॉयज, कंडोम्स, लुब्रिकेंट्स, गर्भ निरोधक, STD टेस्ट्स, अवेयरनेस, पुस्तकें (ज्ञानवर्धक भी, और अश्लील भी), फिल्मों, कपड़ों आदि बहुत सारे रूपों में  देखने को मिलता है | इसकी समझ विकसित करना इसलिए ज़रूरी है ताकि, सेक्स और सेक्सुअलिटी सम्बंधित अपने निर्णय लेते समय समझदारी के साथ चॉइस बनायीं जा सके |

सेक्स, सेक्सुअलिटी से सम्बंधित विषयों को एक पोस्ट या कुछ पोस्ट्स में समझना, समझाना, संवाद कायम करना, या समेटना संभव नहीं है, इसलिए अभी के लिए यहीं तक |

डिस्क्लेमर - मैं सेक्स और सेक्सुअलिटी के सम्बन्ध में बात इसलिए करती हूँ कि पूर्वाग्रहों, कुंठाओं से बाहर आ कर, इस विषय पर संवाद स्थापित किया जा सके, और एक स्वस्थ समाज का विकास किया जा सके | यहाँ किसी की भावनाएं भड़काने, किसी को चोट पहुँचाने, या किसी को क्या करना चाहिए ये बताने का प्रयास हरगिज़ नहीं किया जाता | ऐसे ही, कृपया ये प्रयास मेरे साथ न करें | प्रश्न पूछना चाहें, तो वॉल पर पूछें, या फिर गूगल फॉर्म के लिंक पर, पूछ सकते हैं | इन पोस्ट्स को इनबॉक्स में आने का न्योता न समझें |

©Anupama Garg 2022

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Wednesday, 29 December 2021

सेक्सुअल रिश्ते में खोखलापन क्यों ?

#sexuality_notes_by_Anupama  - 3

मैंने और एक लड़के ने आपसी सहमती से शारीरिक संबंध बनाए। कुछ महीनों से हमारा ये रिलेशन, जोकि सिर्फ शारिरिक संतुष्टि के लिए है, सही चल रहा है। हम एक दूसरे के साथ काफी कम्फर्ट महसूस करते हैं। पर मेरी दुविधा ये है कि मैं जब भी उस से मिलकर आती हुं, बहुत खालीपन महसूस करती हुं। मैंने जीवन के उस मोड़ पर ये संबंध बनाया जब मुझे प्रेम की बहुत ज़रूरत महसूस हो रही थी। जब से उसके साथ हूं तब से मुझे और ज्यादा खालीपन लग रहा और इमोशनल सपोर्ट की ज़रूरत महसूस हो रही है। लेकिन उसका साथ मुझे पसंद है, मैं कुछ ही वक्त के लिए सही पर प्रेम महसूस कर पाती हूं उसकी वजह से।
अपनी राय दें।

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मेरी दोस्त, आपके प्रश्न से इतना समझ पायी कि आप महिला हैं | शायद सिंगल भी हैं | आपकी दुविधा समझ सकती हूँ | इस स्थिति को देखने के कई पहलू हैं, अतः मेरा उत्तर थोड़ा लम्बा हो सकता है | अगर संभव हो तो थोड़े धैर्य के साथ पढें :)

मेरी राय तो नहीं कहूँगी, लेकिन मेरा दृष्टिकोण इस स्थिति के बारे में जैसा है, वो बता रही हूँ | यदि उसमें से आपके कुछ और सवाल हों, तो फॉर्म में फिर से लिख सकती हैं |

प्रेम और सेक्स दो अलग अलग बातें हैं | प्रेम कई प्रकार का होता है, उनमें से प्रेम का एक प्रकार रोमांटिक या सेक्सुअल अट्रैक्शन भी है | इसलिए सबसे पहले अपने आप के साथ कुछ देर बैठ कर ये देखें कि आपने जब ये रिश्ता शुरू किया, तब भावनात्मक प्रेम की चाह थी, या यौन तृप्ति की? यदि इस रिश्ते से आपकी उम्मीद सिर्फ शारीरिक सुख की थी, और यदि वह सुख आप दोनों सहमति से, आनंदपूर्वक एक दूसरे से प्राप्त कर रहे हैं, तो फिर ये जो खालीपन आपको महसूस हो रहा है, ये कहाँ से आ रहा है इसे देखें | क्या ये खालीपन हमारी कंडीशनिंग  का हिस्सा तो नहीं ?

अक्सर हमारे आस पास लोग ऐसा दिखाते हैं कि उनकी रिलेशनशिप्स बहुत खुश हैं, वो बहुत प्रेम में हैं, वो बहुत सेक्सुअली संतुष्ट हैं | लेकिन ये इसलिए क्योंकि हमें लगता है, हम जैसे ही कहेंगे कि हमें संतुष्टि नहीं मिली, हमें जज किया जायेगा | हमें बुरी लड़की, या आवारा लड़के का तमगा मिल जायेगा | अब क्योंकि हम अपने आसपास हमेशा ये ही देखते हैं, तो हम अपने आप से, और अपने पार्टनर से भी ऐसी ही ऊंरेअलिस्टिक संतुष्टि की उम्मीद भी लगा बैठते हैं |

कभी कभी, इसके उलट ये भी होता है, कि किसी रिश्ते की शुरुआत तो होती है एक दृष्टिकोण के साथ, लेकिन समय के साथ साथ, एक या दोनों व्यक्ति की भावनाएं, ज़रूरतें बदल जाती हैं | कई बार हम अपने साथी को ये बताते ही नहीं | इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं, झिझक, 'कहीं मेरे हाथ से ये भी न चला जाये' का डर, 'लेकिन हमने यहाँ से शुरू नहीं किया था, अब बोलेंगे तो साथी क्या समझेंगे?' का जजमेंट आदि | लेकिन बिना बताये तो कभी पता भी नहीं चलेगा कि सामने वाला इस बारे में क्या सोचता है? इसलिए संवाद से डर लगने के बाद भी संवाद ज़रूरी है ! ये संभव है कि आपने जो रिश्ता बिना उम्मीदों के शुरू किया, उससे अब आपकी ज़रूरतें बदल रही हों | ये भी संभव है कि आपके साथी को भी ऐसा लग रहा हो | ऐसे में बात करें ताकि सही स्थिति की पूरी समझ विकसित हो पाए |

इस स्थिति को देखने का एक और पहलू भी है | वो है Rebound और New Relationship Energy | जैसा आपने कहा - इस रिश्ते की शुरुआत एक ऐसे समय में हुयी, जब आपको प्रेम की बहुत आवश्यकता महसूस हो रही थी | कभी कभी, हम एक रिश्ते में से जब बाहर आते हैं, तो बहुत टूटे हुए होते हैं | ऐसे में किसी भी नए रिश्ते की शुरुआत, कुछ दिन, कुछ हफ़्तों, कुछ महीनों तक तो सुकून दे सकती है | लेकिन ऐसे किसी भी रिश्ते की नींव आम तौर पर कच्ची होती है, और बिना सुदृढ़ नींव के रिश्तों में एक समय के बाद खोखलापन मासूस होना लाज़िमी है | ऐसा नहीं है कि ये खोखलापन ठहराव वाले, लॉन्गटर्म रिश्तों में  आ सकता | लेकिन बिना पिछले रिश्ते को प्रोसेस किये, जब नए रिश्ते बनाये जाते हैं, तो ऐसा खालीपन देखने को ज़्यादा मिलता है | बहुत बार ऐसे में हम एक के बाद एक शार्ट टर्म अफेयर्स करते जाते हैं | इसमें नैतिक रूप से कुछ गलत नहीं है, लेकिन, यह रिलेशनशिप की ज़रुरत पूरी नहीं करता | ऐसे में कई बार यह भाव भी घर कर सकता है मन में, कि शायद मैं किसी रिलेशनशिप के लायक ही नहीं हूँ | जबकि इनमें से कुछ भी सच नहीं होता |

हर रिश्ते की एक New Relationship Energy या यूं समझ लें कि एक हनीमून पीरियड भी होता है | ये वो समय है जब रिश्ता नया है, समस्याएं कम और सब कुछ सुन्दर ही सुन्दर नज़र आता है | New Relationship Energy या NRE  का इस बात से कोई सम्बन्ध नहीं, कि आपका रिश्ता शारीरिक भर है, या भावनात्मक, बौद्धिक, सामाजिक आदि भी है | तो आपसे मुझे ये कहना है, कि आपको खालीपन या खोखलापन महसूस होने के पीछे एक कारण ये भी हो सकता है, कि कुछ महीने बीतने के बाद ये NRE आपकी रिलेशनशिप से ख़त्म हो रही हो |

इन सब बातों के बारे में आराम से सोच कर देखें | बिलकुल संभव है कि आपको शायद इस दुविधा के पीछे और कोई वजह भी नज़र आये | जहाँ तक इसके समाधान का सम्बन्ध है, आप जो भी समझेंगी, वो आपको आज या कल, जल्द या देर से, अपने साथी को तो बताना चाहिए, ऐसा मेरी समझ कहती है | उसके बाद उन्हें सोचने का मौका दे कर, उनके विचार जान कर, आप दोनों इस रिश्ते को कैसे, कितना, कब तक आगे बढ़ाना, ये बेहतर तय कर पाएंगे |

उम्मीद है, कुछ समाधान मिला होगा आपको :)

डिस्क्लेमर - मेरी वॉल पर सेक्स और सेक्सुअलिटी के सम्बन्ध में बात इसलिए की जाती है कि पूर्वाग्रहों, कुंठाओं से बाहर आ कर, इस विषय पर संवाद स्थापित किया जा सके, और एक स्वस्थ समाज का विकास किया जा सके | यहाँ किसी की भावनाएं भड़काने, किसी को चोट पहुँचाने, या किसी को क्या करना चाहिए ये बताने का प्रयास हरगिज़ नहीं किया जाता | ऐसे ही, कृपया ये प्रयास मेरे साथ न करें | प्रश्न पूछना चाहें, तो वॉल पर पूछें, या फिर पहले कमेंट में गूगल फॉर्म है, वहां पूछ सकते हैं | इन पोस्ट्स को इनबॉक्स में आने का न्योता न समझें |

©Anupama Garg 2021

गूगल फॉर्म - https://forms.gle/9h6SKgQcuyzq1tQy6

क्या भावनात्मक रूप से एक हुए बिना / आत्मिक प्रेम बनाये बिना / बिना इमोशंस के / सेक्स संतुष्टि प्रदान कर सकता है?

#sexuality_notes_by_Anupama

क्या भावनात्मक रूप से एक हुये बिना सेक्स संतुष्टि प्रदान कर सकता है । दूसरे शब्दों में क्या आत्मिक प्रेम स्थापित हुये बिना मात्र शारीरिक स्तर पर किया गया मैथुन मन को तृप्त कर पाता है? यदि शारीरिक स्तर पर किया गया सेक्स और प्रेम में किये गये सेक्स समान रूप से संतुष्टि दायक हैं तो फिर अन्य अनेक लोगों को मैं देखता हूं कि वे किसी के साथ सारीरिक रूप से मैथुन करने के बाद पुनः शीघ्र ही अपनी संतुष्टि किसी अन्य पुरुष या स्त्री में खोजने लगते हैं, ऐसा क्यों है कि शारीरिक क्षुधा शांत होने पर भी मन अतृप्त रहता है ?

जी मैम, मैं इस संदर्भ में बहुत हद तक अनभिज्ञ हूं इसलिए यह प्रश्न अक्सर मेरे सामने आता है । इस संदर्भ में मेरा ग्यान ज्यादातर किताबी ही है, इसलिए प्रश्न में तनिक भ्रम सा दिखाई पड़ सकता है इसलिए क्षमा करें । भैरप्पा बहुत दृढ़ता से सम्भोग और मैथुन (sex) और सम्भोग को अलग अलग परिभाषित करता है |  वात्स्यायन भी इसमें अंतर करता है । जबकि अंग्रेजी में इसके लिये कोई अलग शब्द ही नहीं है । उपरवास से सम्भोग की प्रक्रिया तक स्त्री और पुरुष का पहुंचना क्या वस्तुतः मैथुन ही है और अगर ऐसा है तो परिणाम में सामान्यतः अंतर क्यों दिखाई देता है । क्यों एक पुरुष सुखी दामपत्य जीते हुये भी अपनी तृप्ति महसूस नहीं कर पाता और क्यों किसी को एक सामान्य चुम्बन भी तृप्ति का बोध करा देता है ?

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इसका कोई सीधा जवाब नहीं है | सेक्स व्यक्तिगत होता है | कई लोग हैं, जिन्हें बिना बौद्धिक उत्तेजना के बगैर किया सेक्स संतुष्टि नहीं देता | ऐसे लोगों को Sapiosexual कहा जाता है | वहीँ दूसरी तरफ ऐसे लोग भी हैं, जिन्हें प्रेम में ही उत्तेजना, और प्रेमी के साथ किये सेक्स से ही आनंद की प्राप्ति होती है | ऐसे लोगों को Demisexual कहा जाता है | लेकिन वहीँ Asexual लोग भी हैं, जिन्हें सेक्सुअल उत्तेजना नहीं होती | उन्हें लोगों से प्रेम होता है, वे लोगों से शारीरिक, भावनात्मक सम्बन्ध बना सकते हैं, वे लोगों के गले लग सकते हैं, उन्हें बाहों में भी भर सकते हैं, उन्हें रोमांटिक स्पर्श की इच्छा भी हो सकती है, लेकिन सेक्स या जिसे आप मैथुन या सम्भोग कह रहे हैं, उसकी इच्छा नहीं होती |

ठीक इसी तरह ऐसे लोग भी हैं, जो सेक्स को सिर्फ शारीरिक आवश्यकता की तरह देखते हैं, उसे पूरा भी करते हैं, और उन्हें इसके लिए emotions या commitment या spiritual सम्बन्ध की आवश्यकता नहीं होती | इसका व्यक्ति के जेंडर से कोई सम्बन्ध नहीं है | महिलाएं या पुरुष कोई भी ऐसा हो सकता है | सेक्स को सिर्फ शारीरिक आवश्यकता की तरह देखने वाले लोग इसे पूरा भी करें, ये कोई ज़रूरी नहीं है | इसका मतलब ये भी नहीं, कि वे अपने सेक्सुअल साथी / साथियों के प्रति सम्मान नहीं रखते | ये भी ज़रूरी नहीं, कि बहुत से लोग ये समझते भी हों कि सेक्स उनके लिए मात्रा एक शारीरिक आवश्यकता है | विशेष तौर पर इसलिए क्योंकि सेक्स के बारे में हमारी समझ अधिकतर कंडीशनिंग, सामाजिक और नैतिक मूल्यों, दंड विधान आदि से विकसित होती है |

कई समाजों में (जैसे हमारे अपने समाज को ही उदाहरण के तौर पर देखें, या जैसे और भी बहुत से साउथ एशियाई देशों में सेक्स को ले कर बहुत कुंठा है), सेक्स की बात करने या, सेक्स की इच्छा दर्शाने पर, या सेक्स कर लेने पर भी, लोगों की सामाजिक, नैतिक प्रताड़ना की जाती है | ऐसे में लोग अक्सर ये दिखाने की कोशिश करते हैं, कि उन्हें अपने साथी से प्रेम भी है | ऐसे समाज में अक्सर, सेक्स की बातें, सेक्स की प्रक्रिया, और सेक्स का अनुभव, सभी बहुत ढोंग और कुंठाओं से भर जाता है |

वहीँ दूसरी ओर, जिन समाजों में सेक्सुअलिटी का सम्यक अध्ययन किया जा रहा है वहां सेक्सुअलिटी के बारे में नए तथ्य सामने आ रहे हैं | जहाँ अपनी सेक्सुअल डिजायर बताने पर पाबन्दी नहीं है, जहाँ सेक्सुअल भिन्नता के लिए दंड का प्रावधान नहीं है, वहां लोग ठीक से और सवालों के साथ, इस सवाल का भी जवाब दे पा रहे हैं | ये एक अलग बात है, कि धीरे धीरे वक़्त बदल रहा है, और जैसे जैसे समाज में लोगों के अनुभव बदलेंगे, वैसे ही धीरे धीरे शायद समाज की सेक्स, संतुष्टि, और आनंद को ले कर अवधारणाएं भी |

मेरे व्यक्तिगत अनुभव में, हमने सदियों से इस बारे में बात ही न कर के इस विषय को बेवजह ज़रुरत से ज़्यादा उलझन भरा बना दिया है | सेक्स अनुभव और संवाद का विषय ज़्यादा है, अध्ययन का कम | इसलिए हमारे प्रश्न यदि इस बात पर ज़्यादा ध्यान दें कि हम स्वयं, और अपने साथी को कैसे आनंद पहुंचा सकते हैं, तो हम पाएंगे कि हमारे सम्बन्ध कहीं बेहतर होंगे, बजाय इसके कि कामसूत्र में कितनी मुद्राएं हैं, या भैरप्पा सम्भोग व मैथुन के लिए अलग अलग term  उसे करते हैं या नहीं | वैसे सन्दर्भ में बताती चलूँ, कि अंग्रेज़ी में सेक्स शब्द को बहुत आराम से इस्तेमाल किया जाता है, मैथुन के लिए शब्द 'coitus' है, लेकिन वहां लोगों से ये उम्मीदें नहीं की जातीं कि वे जब तक शुद्ध भाषा में बात न कर सकें, तब तक उनके प्रश्न, उनके उत्तर, या उनके अनुभवजन्य विचार मान्य नहीं होंगे |

खैर विषय से इतर गए बिना, मूल प्रश्न पर लौटते हुए - सेक्स एक व्यक्तिगत अनुभव है, इसलिए कुछ लोगों को भावनात्मक रिश्ते के बिना संतुष्टि नहीं मिलती, कुछ लोगों को मिलती है | हाँ सहमति ज़रूरी है | भारतीय विधि के प्रावधान के अनुसार सहमति देने का विषय अपने आप में काफी विशद है, इसलिए वो किसी और दिन |

डिस्क्लेमर - मेरी वॉल पर सेक्स और सेक्सुअलिटी के सम्बन्ध में बात इसलिए की जाती है कि पूर्वाग्रहों, कुंठाओं से बाहर आ कर, इस विषय पर संवाद स्थापित किया जा सके, और एक स्वस्थ समाज का विकास किया जा सके | यहाँ किसी की भावनाएं भड़काने, किसी को चोट पहुँचाने, या किसी को क्या करना चाहिए ये बताने का प्रयास हरगिज़ नहीं किया जाता | ऐसे ही, कृपया ये प्रयास मेरे साथ न करें | प्रश्न पूछना चाहें, तो वॉल पर पूछें, या फिर पहले कमेंट में गूगल फॉर्म है, वहां पूछ सकते हैं | इन पोस्ट्स को इनबॉक्स में आने का न्योता न समझें |

©Anupama Garg 2021

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