Friday, 14 August 2020

चूड़ियाँ और सोच

9/8/2014

मुकुल
ने लिखा,

सुनयना चूडियाँ पहनती है,

और मैं सोच।’’

मगर,

क्या चूड़ियाँ और सोच,

नैसर्गिक रूप से, निश्चित ही,

एक दूसरे के विपरीत बोध है ?

क्या ही ज़रूरी है,

कि मैं जो सोच पहनूँ,

तो चूडियाँ छोड़ ही दूँ ?

 

मेरे घर में,

चूड़ियाँ और सोच,

साथ पहनी जा सकती हैं,

साथ पहनी जाती हैं

इसीलिए मैं,

चूड़ियाँ पहनती हूँ,

और साथ ही ...............सोच भी।

© Anupama Garg 

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