Friday, 29 January 2021

रंग तो रंग हैं

सुना है ख़ास रंग तीन ही होते हैं
सुना है, हर रंग के अनेकों शेड्स होते हैं |
हरे के शेड्स, एक कौम के लिए,
लाल के, किसी राजनैतिक विचारधारा के लिए,
नीला लड़कों का, गुलाबी लड़कियों का,
और इंद्रधनुषी? क्युईर लोगों का कहते सुना है मैंने |

खेतों खलिहानों में सुना है,
हरे से सुनहला होता है रंग फसल का |
लेकिन भूख का रंग कौनसा है?
और प्यास का?

तिरंगे में तीन रंग हैं,
वीरता, अमन, और खुशहाली के|
मगर रंग कौन सा है,
कहो तो ज़ारो-ज़ार छलकते आँसुओं का?





वर्दियों के भी रंग सुने हैं
खाकी, सुफैद, काला |
मगर कहो तो तुम,
कौन सा है रंग,
शर्मसार करने वाले फैसलों का?

रंग हैं इतना भर काफी नहीं है,
रंगों को भरना होगा ,
सही रंग सही जगह |
तभी होगा सृजन सुंदरता का,
प्रकृति के गर्भ से,
मानव के मर्म से |

बाकी क्या है, रंग तो रंग हैं
सब मिल गए तो प्रकाश होगा,
वरना तो कालिख पुती ही है |
मुंह पर,
देह पर,
आत्मा पर भी!

© Anupama Garg 2021

No comments:

Post a comment

Share your thoughts