Sunday, 15 September 2019

असुविधाजनक बातें - भाग 2

कल की बात से आगे बढ़ाते हुए......

एक सवाल आज ही मुझसे किसी ने ने पूछा - डेटिंग तक तो ठीक है, मगर आपको सेक्स के बारे में बात करना ज़रूरी क्यों लगता है? मेरा उनसे प्रतिप्रश्न था - यदि मैं जियोग्राफी या गणित या फिल्मों की बात करती तो आपको दिक्कत होती?

वे - नहीं,मगर सेक्स व्यक्तिगत है |
मैं - तो क्या मैं स्वास्थ्य की बात कर लूँ ?
वे - हाँ, क्यों नहीं?
मैं - मुझे जब डिप्रेशन हुआ था, उस बारे में?
वे - हाँ हाँ ज़रूर, क्यों नहीं ?
मैं - लेकिन वो भी तो व्यक्तिगत है?
वे - हाँ लेकिन सेक्स के बारे में बात नहीं करते |
मैं - वो मैं समझी, मगर क्यों?
वे - यार तुम तो ज़िद पर अड़ गयी हो !
मैं - चलिए कुछ सवालों के जवाब दीजिये | आपकी शादी हुए १० साल से ज़्यादा हुए, बच्चे भी हैं, सेक्स किया था?
वे - वो तो सब करते हैं |
मैं - लेकिन Asexual लोग नहीं करते | आप जानते हैं, asexuality क्या होती है?
वे - ......(सन्नाटा)
मैं - छोड़िये, दूसरा सवाल! आप अब भी सेक्स करते हैं?
वे - ( सकुचाते हुए) - हाँ, पर उतना नहीं |
मैं - खाना भी बहुत कम खाते होंगे फिर?
वे - दोनों में क्या सम्बन्ध है? खाना तो बीवी उतना ही खिलाती है |
मैं - तो सेक्स क्यों नहीं करती? ये आप जानते हैं?
वे - नहीं, कहती मूड नहीं और मैं ज़ोर नहीं डालता |
मैं - आपको क्या मन करता है?
वे - अब मैं इस पर क्या ही बोलूं? सेक्स की इच्छा तो होती ही है |
मैं - तो आप मानते हैं की ज़रूरी है?
वे - हाँ वो तो है ही |
मैं - और आपको लगता है, कि इस विषय में आपका अपनी पत्नी से बात करना उचित और ज़रूरी नहीं है?
वे - शायद तुम ठीक कह रही हो | मुझे तो ये भी नहीं पता कि उसे 15 साल बाद पसंद क्या है?
मैं - अब अगर मैंने सेक्स की बात अपनी वाल पर, या व्हाट्सप्प पर नहीं की होती, तो क्या आपको पता चलता कि एसेक्सुअलिटी (asexuality) नाम की कोई चीज़ भी है? या कि आपको अपनी पत्नी की पसंद - नापसंद भी नहीं पता - क्या आप ये जान पाते?

सवाल यह है कि वह कौन से मुद्दे हैं जिन्हें हम सुलझाना तो चाहते हैं, मगर जिनके बारे में हम बात नहीं करना चाहते, जिनके बारे में हमें संवाद करना और विमर्श करना कोई सिखाता नहीं ? इन मुद्दों में से सवाल सेक्स के इर्द-गिर्द घूमते हैं चाहे वह शादी में पति-पत्नी के बीच बनने वाला यौन संबंध हो, या वह जबरदस्ती किया गया किसी का बलात्कार, या यौन कुंठा ओं के बारे में के बारे में किसी से बात ना कर पाने की लाचारी, और या फिर प्यार और सेक्स में फर्क न कर पाने से पैदा हुयी उलझन |

ये सारे ही सवाल ऐसे हैं, जिनके कोई सीधे जवाब हैं ही नहीं | इन सभी सवालों से हो कर गुजरने वाले रास्ते और गलियां भूल भुलईंया जैसे लग सकते हैं | और इन पहेलियों को सुलझाने का एक ही तरीका है - लगातार संवाद | जब हर स्तर पर संवाद संभव होगा,तभी इन सवालों के बहुमुखी जवाब भी मिलेंगे |

© Anupama Garg 2019

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